हिन्दू धर्म में परिक्रमा या प्रदक्षिणा का विशेष महत्व माना गया है। हिंदू धर्म में प्राचीन समय से ही लोग परिक्रमा करते चले आ रहे हैं। परिक्रमा करना पूजा का ही एक अंग माना गया है। जब परिक्रमा कर रहे हो तो इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जिस स्थान की आप परिक्रमा कर रहै हैं उस ओर आपका दाहिना अंग होना चाहिए। देव स्थान आदि पर प्रतिदिन पूजा पाठ मंत्रोच्चार, घंटा और शंख की ध्वनि होती है। जिससे उस पूरे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। जब कोई व्यक्ति परिक्रमा करता है तो उस पवित्र स्थान की सकारात्मक ऊर्जा उस व्यक्ति के ऊपर भी अपना प्रभाव डालती है। जिससे व्यक्ति के लिए बहुत फायदेमंद होती है। परिक्रमा भी कई प्रकार की होती हैं। तो चलिए जानते हैं कि कितने प्रकार की होती है परिक्रमाएं