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Shri Krishna First Name: भगवान श्रीकृष्ण का पहला नाम क्या था ? जानें यशोदानंदन के 108 नाम

Fri, 18 Jul 2025 03:25 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Bhagwan Krishna Ke 108 Naam: हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथों जैसे श्रीमद्भागवत पुराण, हरिवंश पुराण और महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा विस्तार से वर्णित है। शास्त्रों में उनके 108 दिव्य नामों का उल्लेख मिलता है, जिनमें हर नाम उनके किसी विशेष गुण, रूप, लीला या भूमिका से जुड़ा हुआ है। 
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Bhagwan Krishna Ka Pahla Naam - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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Bhagwan Krishna Ka Pahla Naam: भगवान श्रीकृष्ण, जगत के पालनकर्ता, मुरलीधर, यशोदानंदन और गीता उपदेशक के रूप में जाने जाते हैं। उनके नाम जितने प्यारे हैं, उतने ही रहस्यमयी भी। शास्त्रों में उनके 108 दिव्य नामों का उल्लेख मिलता है, जिनमें हर नाम उनके किसी विशेष गुण, रूप, लीला या भूमिका से जुड़ा हुआ है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि श्रीकृष्ण को सबसे पहला नाम क्या दिया गया था?  जब वे इस धरती पर अवतरित हुए, जब वसुदेव और देवकी की गोद में पहली बार आए , तो उन्हें किस नाम से पुकारा गया? सिर्फ कृष्ण या फिर कुछ और?

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हर नाम उनके एक विशिष्ट पहलू को उजागर करता है कहीं वे एक बाल गोपाल हैं, कहीं युद्धभूमि के सारथी, कहीं रण छोड़ने वाले रणछोड़ तो कहीं दुष्टों का नाश करने वाले धर्मरक्षक। आइए जानते हैं कि भगवान कृष्ण का सबसे पहला नाम क्या था। और इसके साथ ही उनके 108 नाम के बारे में जानते हैं । 

Bhagwan Krishna Ka Pahla Naam - फोटो : Adobe Stock
क्या कहते हैं शास्त्र?
हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथों जैसे श्रीमद्भागवत पुराण, हरिवंश पुराण और महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा विस्तार से वर्णित है। इन शास्त्रों के अनुसार, श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा नगरी में हुआ था, जहां वे वसुदेव और देवकी की आठवीं संतान के रूप में अवतरित हुए। लेकिन जन्म लेते ही उन्हें एक संकट से गुजरना पड़ा क्योंकि मथुरा पर अत्याचारी कंस का आतंक छाया हुआ था, जो देवकी की संतानों को काल के मुंह में पहुंचा रहा था। 
शास्त्रों के अनुसार, श्रीकृष्ण का मूल नाम स्वयं उनके पिता वसुदेव ने ‘कृष्ण’ रखा था। श्रीमद्भागवत पुराण (स्कंध 10, अध्याय 3, श्लोक 31) में इसका स्पष्ट उल्लेख है, जहां वसुदेव अपने पुत्र के रंग और दैवीय गुणों को देखकर उन्हें ‘कृष्ण’ नाम से संबोधित करते हैं। 'कृष्ण' शब्द का अर्थ होता है गहरे रंग वाला, आकर्षक, सर्वगुणसंपन्न। यह नाम न केवल उनके श्याम वर्ण को दर्शाता है, बल्कि उनके सम्मोहक व्यक्तित्व और दिव्यता का भी प्रतीक है।
कुछ वैष्णव परंपराओं और शास्त्रीय टीकाओं में यह भी बताया गया है कि वसुदेव ने उन्हें ‘वासुदेव’ कहकर भी पुकारा, जो कि ‘वासुदेव के पुत्र’ के रूप में प्रयोग होता है। यही कारण है कि बाद में उनका एक प्रचलित नाम बना वासुदेव-कृष्ण। संस्कृत के महान व्याकरणाचार्य पाणिनि की कृतियों में भी ‘वासुदेव’ को एक स्वतंत्र देवता के रूप में मान्यता दी गई है, जो श्रीकृष्ण के विशिष्ट रूप का प्रतीक है। इससे यह स्पष्ट होता है कि ‘वासुदेव’ नाम केवल एक पारिवारिक संबोधन नहीं, बल्कि एक पूजनीय आध्यात्मिक पहचान भी थी।

Bhagwan Krishna Ka Pahla Naam - फोटो : Adobe Stock
गोकुल में श्रीकृष्ण को मिले अनेकों नाम 
कंस के आतंक से बचाने के लिए वसुदेव कृष्ण को लेकर गोकुल पहुंचे और उन्हें नंदबाबा और यशोदा को सौंप दिया। गोकुल में पालन-पोषण के दौरान यशोदा और नंदबाबा ने श्रीकृष्ण को स्नेहवश कई नाम दिए। इन्हें कान्हा, कन्हैया, गोपाला और ‘नंदलाला’ था। ये नाम श्रीकृष्ण के बाल-स्वरूप, उनकी लीलाओं और गोकुल के अनुसार थे। गाय पालक होने के कारण कृष्ण को गोपाल, नंदलाला , यशोदा नंदन, कन्या, कन्हैया अदड़ी नाम दिए गए।  गर्ग संहिता के अनुसार गर्ग मुनि ने उनका नाम ‘कृष्ण’ रखा था। ऐसे में प्रभु का पहला नाम ‘वासुदेव’ माना गया है।
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Bhagwan Krishna Ka Pahla Naam - फोटो : freepik
भगवान श्री कृष्ण के 108 नाम
1. कृष्ण
2. कमलनाथ
3. वासुदेव
4. सनातन
5. वसुदेवात्मज
6. पुण्य
7. लीलामानुष विग्रह
8. श्रीवत्स कौस्तुभधराय
9. यशोदावत्सल
10. हरि
11. चतुर्भुजात्त चक्रासिगदा
12. सङ्खाम्बुजा युदायुजाय
13. देवाकीनन्दन
14. श्रीशाय
15. नन्दगोप प्रियात्मज
16. यमुनावेगा संहार
17. बलभद्र प्रियनुज
18. पूतना जीवित हर
19. शकटासुर भञ्जन
20. नन्दव्रज जनानन्दिन
21. सच्चिदानन्दविग्रह
22. नवनीत विलिप्ताङ्ग
23. नवनीतनटन
24. मुचुकुन्द प्रसादक
25. षोडशस्त्री सहस्रेश
26. त्रिभङ्गी
27. मधुराकृत
28. शुकवागमृताब्दीन्दवे
29. गोविन्द
30. योगीपति
31. वत्सवाटि चराय
32. अनन्त
33. धेनुकासुरभञ्जनाय
34. तृणी-कृत-तृणावर्ताय
35. यमलार्जुन भञ्जन
36. उत्तलोत्तालभेत्रे
37. तमाल श्यामल कृता
38. गोप गोपीश्वर
39. योगी
40. कोटिसूर्य समप्रभा
41. इलापति
42. परंज्योतिष
43. यादवेंद्र
44. यदूद्वहाय
45. वनमालिने
46. पीतवससे
47. पारिजातापहारकाय
48. गोवर्थनाचलोद्धर्त्रे
49. गोपाल
50. सर्वपालकाय
51. अजाय
52. निरञ्जन
53. कामजनक
54. कञ्जलोचनाय
55. मधुघ्ने
56. मथुरानाथ
57. द्वारकानायक
58. बलि
59. बृन्दावनान्त सञ्चारिणे
60. तुलसीदाम भूषनाय
61. स्यमन्तकमणेर्हर्त्रे
62. नरनारयणात्मकाय
63. कुब्जा कृष्णाम्बरधराय
64. मायिने
65. परमपुरुष
66. मुष्टिकासुर चाणूर मल्लयुद्ध विशारदाय
67. संसारवैरी
68. कंसारिर
69. मुरारी
70. नाराकान्तक
71. अनादि ब्रह्मचारिक
72. कृष्णाव्यसन कर्शक
73. शिशुपालशिरश्छेत्त
74. दुर्यॊधनकुलान्तकृत
75. विदुराक्रूर वरद
76. विश्वरूपप्रदर्शक
77. सत्यवाचॆ
78. सत्य सङ्कल्प
79. सत्यभामारता
80. जयी
81. सुभद्रा पूर्वज
82. विष्णु
83. भीष्ममुक्ति प्रदायक
84. जगद्गुरू
85. जगन्नाथ
86. वॆणुनाद विशारद
87. वृषभासुर विध्वंसि
88. बाणासुर करान्तकृत
89. युधिष्ठिर प्रतिष्ठात्रे
90. बर्हिबर्हावतंसक
91. पार्थसारथी
92. अव्यक्त
93. गीतामृत महोदधी
94. कालीयफणिमाणिक्य रञ्जित श्रीपदाम्बुज
95. दामोदर
96. यज्ञभोक्त
97. दानवेन्द्र विनाशक
98. नारायण
99. परब्रह्म
100. पन्नगाशन वाहन
101. जलक्रीडा समासक्त गोपीवस्त्रापहाराक
102. पुण्य श्लॊक
103. तीर्थकरा
104. वेदवेद्या
105. दयानिधि
106. सर्वभूतात्मका
107. सर्वग्रहरुपी
108. परात्पराय


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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