मां शैलपुत्री की पौराणिक कथा
माता दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की कथा बहुत रोचक है। पौराणिक कथा के अनुसार राजा दक्ष ने एक बार अपने राज महल में यज्ञ का आयोजन करवाया था। राजा दक्ष का अपने दामाद भगवान शिव से बहुत ज्यादा मतभेद था जिसके कारण वह भगवान शिव से गुस्सा रहते थे। राजा दक्ष ने सभी देवी-देवताओं को बुलाया लेकिन शिव जी का अपनान करने के लिए उनको यज्ञ में नहीं बुलाया। जब यह बात माता पार्तती को पता चली तो वह अपने पिता के द्वारा करवाए गए यज्ञ में शामिल होना चाहती थी। शिवजी के कई बार मना करने के बाद भी माता पार्वती नहीं मानी और अकेले अपने पिता के घर यज्ञ में शामिल होने के लिए चली गईं। वहां पर अपने पति का का पिता दक्ष द्वारा आयोजित यज्ञ में शिव का अपमान देख सती ने आत्मदाह कर लिया। इसके बाद भगवान शिव ने क्रोधित होकर यज्ञ को तहस नहस कर दिया और सती के शरीर को लेकर विचरण करने लगे। तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उनके शरीर के 51 अंग विभक्त किए, जो शक्तिपीठ कहलाए। इसके बाद सती ने हिमालय के घर जन्म लेकर शैलपुत्री के रूप में अवतार लिया।
मां शैलपुत्री की आराधना का मंत्र
नवरात्रि के पहले दिन मंत्र का जाप करने से मां शैलपुत्री की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नमः।’
या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
मां शैलपुत्री आरती Maa Shailputri Aarti in Hindi
शैलपुत्री मां बैल सवार। करें देवता जय जयकार।
शिव शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने ना जानी
पार्वती तू उमा कहलावे। जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू। दया करे धनवान करे तू।
सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती तेरी जिसने उतारी।
उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुख तकलीफ मिला दो।
घी का सुंदर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के।
श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं। प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।
जय गिरिराज किशोरी अंबे। शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।
मनोकामना पूर्ण कर दो। भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।