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Sawan 2025: सावन में कढ़ी-दही क्यों नहीं खानी चाहिए? जानिए धार्मिक और वैज्ञानिक कारण

Wed, 09 Jul 2025 04:24 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Sawan Mein Kadhi Kyon Nahin Khate: सावन में दही, कढ़ी और दूध जैसी चीजों का सेवन धार्मिक रूप से वर्जित माना गया है क्योंकि ये व्रत की शुद्धता को प्रभावित करती हैं, साथ ही वैज्ञानिक दृष्टि से भी इस मौसम में ये चीजें पाचन में गड़बड़ी और संक्रमण का कारण बन सकती हैं।
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सावन में कढ़ी क्यों नहीं खानी चाहिए - फोटो : adobe stock
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विस्तार
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Sawan Me Kya Nahi Khana Chahiye: सावन का पावन महीना 11 जुलाई 2025 से शुरू हो रहा है, जो कि भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दौरान श्रद्धालु व्रत, पूजन और नियमपूर्वक आहार-विहार का पालन करते हैं। इस बार सावन का पहला सोमवार 14 जुलाई को पड़ेगा, जिसे विशेष रूप से पूजनीय माना जाता है। इस पवित्र माह में खानपान को लेकर भी कुछ विशेष सावधानियां बरती जाती हैं।

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सावन में दही, कढ़ी और रायते जैसे ठंडी प्रकृति वाले पदार्थों का सेवन वर्जित माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ये चीजें शरीर में तामसिकता बढ़ाती हैं, जिससे पूजा-पाठ और व्रत की शुद्धता भंग हो सकती है। वहीं वैज्ञानिक कारण यह है कि सावन का मौसम नमी और बैक्टीरिया से भरपूर होता है, जिससे इन खाद्य पदार्थों के सेवन से पेट संबंधी बीमारियां, संक्रमण और अपच की समस्या हो सकती है। इसी कारण सावन में इन चीजों से परहेज करना स्वास्थ्य और आध्यात्मिक दृष्टि से लाभकारी होता है।
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सावन में कढ़ी न खाने का धार्मिक कारण 
धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन मास में दूध और दही से बनी चीजों का सेवन करना उचित नहीं माना जाता। खासकर दही, कढ़ी और रायता जैसे पदार्थों से परहेज करने की सलाह दी जाती है। इसका एक कारण यह भी है कि भगवान शिव को सावन में कच्चा दूध अर्पित किया जाता है, इसलिए इस दौरान उसे पीना वर्जित माना गया है। आयुर्वेद के अनुसार भी इस मौसम में दूध और दही जैसे भारी और ठंडे पदार्थ शरीर में बीमारियों को न्योता दे सकते हैं। नमी और बदलते मौसम के कारण इनसे पाचन संबंधित परेशानियां हो सकती हैं। इसलिए सावन में ताजगी और स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए इन चीजों का सेवन टालना श्रेयस्कर होता है।
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सावन में कढ़ी न खाने का वैज्ञानिक कारण 
सावन के महीने में दही और कढ़ी जैसे खाद्य पदार्थों से परहेज करने के पीछे वैज्ञानिक कारण भी हैं। इस मौसम में वातावरण में अत्यधिक नमी होती है और तापमान अपेक्षाकृत ठंडा रहता है, जिससे पाचन तंत्र धीमा हो जाता है। दही में मौजूद अम्लीय तत्व इस समय शरीर के लिए भारी साबित हो सकते हैं और गैस, एसिडिटी या अन्य पाचन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। इसके अलावा, बारिश के मौसम में पशु चरने के लिए जिस घास का सेवन करते हैं, उसमें कीड़े-मकोड़े लगे हो सकते हैं, जिससे दूध की शुद्धता पर असर पड़ता है। ऐसे में यह दूध शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए सावन के दौरान कढ़ी, दही और रायता जैसे पदार्थों को खाने से बचने की सलाह दी जाती है, ताकि पाचन ठीक रहे और स्वास्थ्य पर विपरीत असर न पड़े।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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