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Mangala Gauri Vrat: आज रखा जा रहा है चौथा मंगला गौरी व्रत, जानें क्या है व्रत के नियम

Tue, 13 Aug 2024 06:00 AM IST
शिखर बरनवाल धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

 श्रावण मास का हर मंगलवार मां पार्वती को समर्पित होता है, इसलिए इस साल कुल 4 मंगला गौरी व्रत मनाया जाएगा। आइए इस लेख में मंगला गौरी व्रत के नियम, पूजा विधि, मंत्र आदि के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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Mangla Gauri Vrat 2024 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Mangla Gauri Vrat Rule: सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। इस महीने में कई तरह के व्रत और त्योहार मनाए जाते हैं, जिनमें से एक है मंगला गौरी व्रत। श्रावण मास का हर मंगलवार मां पार्वती को समर्पित होता है, इसलिए इस साल कुल 4 मंगला गौरी व्रत मनाया जाएगा। सावन के तीन मंगला गौरी व्रत का त्योहार बीत चुका है, अब चौथा और आखिरी मंगला गौरी व्रत आज यानी 13 अगस्त 2024 को मनाया जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए और कुवारी कन्या मनोवांछित वर पाने पाने के लिए मंगला गौरी व्रत रखती हैं। इस साल सावन का चौथा मंगला गौरी व्रत आज रखा जा रहा है। आइए इस लेख में मंगला गौरी व्रत के नियम, पूजा विधि, मंत्र आदि के बारे में विस्तार से जानते हैं।

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व्रत के नियम
व्रत का संकल्प लेकर दिनभर संयमित रहें और सिर्फ सात्विक आहार ग्रहण करें। शरीर और मन की पवित्रता बनाए रखें। पूजा विधि का अच्छे से पालन करें और ध्यानपूर्वक मंत्रों का जाप करें। आज काले और नीले रंग के वस्त्र पहनने से बचें। भगवान को भोग अर्पित करने के बाद ही स्वयं भोजन ग्रहण करें। व्रत के दिन जरूरतमंदों को दान करें और उनकी सेवा करें।

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 मंत्र:-
"ॐ श्री गौरी शंकराय नमः"
"ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं गौरी मंगला याय नमः"

मंगला गौरी व्रत पूजा विधि
इस दिन सबसे पहले सुबह स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। देवी गौरी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। फिर घर के मंदिर या पूजा स्थान को स्वच्छ करें और वहां पर देवी गौरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। पूजा के लिए नैवेद्य (भोग), जल, चंदन, अक्षत (चावल), फूल, धूप, दीप, और वस्त्र तैयार करें। मां पार्वती को लाल रंग के वस्त्र और सुहाग का सामान अर्पित करते हुए विधि-विधान से पूजा करें। इसके बाद घी का दीपक जलाएं एवं आरती करें । इस बात ध्यान रखें कि पूजा के लिए सभी सामग्रियों जैसे फल, पान, लड्डू, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, सुहाग की सामग्री और चूड़ियां आदि की संख्या 16 होनी चाहिए। पूजा सामग्रियों को अर्पित करने के बाद मंगला गौरी की व्रत कथा सुनें। पूजा के बाद पति की लंबी आयु और सुखमय दांपत्य जीवन की कामना करें।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस लेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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