भारतीय धर्म परंपरा में सावन सबसे ज्यादा आध्यात्मिक है। विशेषकर शिव की पूजा, अर्चना, अभिषेक (रुद्राभिषेक) महामृत्युंय जाप आदि पूजा उपासना इन दिनों की जाती है। कहा जाता है कि समुद्र-मंथन के समय शिव ने हलाहल का पान करने से उनका नाम नीलकंठ पड़ा। देवों ने उन पर गंगाजल का अभिषेक किया।
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तभी से सावन में शिव को जल,बिल्व-पत्र,फूल, पंचामृत, गंध आदि का अर्पण उत्तम माना जाता है। माह का हर दिन महत्वपूर्ण दिन है। हर सोमवार को शिव की पूजा की जाती है। मंगलवार को महिलाएं गौरी की पूजा करके परिवार के सुख समृद्धि की कामना करती हैं।
बुद्ध को विष्णु के विट्ठल अवतार की याचना करते हैं। गुरुवार को गुरु और शुक्रवार को लक्ष्मी की पूजा-अर्चना कर उन्हें प्रसन्न किया जाता है। शनिवार को धन ऐश्वर्य के लिए शनि देव की पूजा करते हैं। रविवार को सूर्य की पूजा की जाती है। इस मास में नाग-पंचमी, पुत्रदा एकादशी, हिंडोला, हरियाली तीज, पूर्णिमा,रक्षा-बंधन, वर-लक्ष्मी व्रत इत्यादि जैसे व्रत होते हैं।