Sarva Pitru Amavasya 2025: सर्वपितृ अमावस्या को महालय और सर्व मोक्ष अमावस्या भी कहा जाता है। पितरों की कृपा प्राप्त करने के लिए यह पितृ पक्ष का आखिरी दिन होता है। इस दिन किया गया श्राद्ध कर्म और तर्पण सभी पितरों के नाम से किया जाता है। इस बार अमावस्या तिथि की शुरुआत 20 तारीख को रात 12 बजकर 17 मिनट पर होगी और 21 तारीख को रात में 1 बजकर 24 मिनट पर अमावस्या तिथि समाप्त होगी। ऐसे में सर्वपितृ अमावस्या 21 तारीख को ही मनाई जाएगी। इस बार सर्वपितृ अमावस्या पर शुभ योग और सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेगा।
तिल और जल का दान
तर्पण में तिल और जल का विशेष महत्व बताया गया है। तिल का दान पापों का नाश करता है और जल पितरों तक तृप्ति पहुंचाता है।
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स्वर्ण और धातु का दान
शास्त्रों में सोने, चांदी या धातु की वस्तुओं का दान श्रेष्ठ बताया गया है। यह दान समृद्धि का प्रतीक है और इससे जीवन में धन-धान्य की वृद्धि होती है।
दीपक और गौदान
इस दिन पितरों के नाम के दीये दान करने से पितृ प्रसन्न होते हैं। गौदान को सभी दानों में श्रेष्ठ माना गया है। यदि गौदान संभव न हो तो गौमाता को हरा चारा, रोटी और गुड़ खिलाना भी पुण्यकारी होता है।
अन्य दान योग्य वस्तुएं