सकट चौथ व्रत 2023: शुक्लपक्ष में आने वाली चतुर्थी को विनायक और कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है।
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Sakat Chauth 2023 Moonrise Timing Today: आज सकट चौथ है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सकट चौथ का व्रत रखा जाता है। महिलाएं इस दिन अपने संतान की सुख-समृद्धि और लंबी आयु का कामना के सकट चौथ का निर्जला व्रत रखा जाता है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि गणेश चौथ पर भगवान गणेश की जन्म हुआ था। संकष्टी गणेश चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी, तिलकुटा चौथ या माघी चौथ भी कहते हैं। हिन्दू धर्म में स्त्रियों के ऐसे अनेक व्रत और त्योहार होते हैं, जिनमें दिनभर उपवास के बाद रात्रि में जब चंद्रमा उदय हो जाता है, तब चंद्रदेव को अर्घ्य देकर और पूजा करके ही अन्न-जल ग्रहण किया जाता है। संकष्टी चतुर्थी का व्रत महिलाएं अपने परिवार के स्वास्थ्य व दीर्घायु होने की मंगल कामना से करती हैं। आइए जानते हैं सकट चौथ व्रत का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा और आज शाम को आपके शहर में चांद निकलने का समय...
सकट चौथ 2023 तिथि और मुहूर्त
सकट चौथ तिथि: 10 जनवरी, 2023, मंगलवार
चतुर्थी तिथि का आरंभ: 10 जनवरी को दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से
चतुर्थी तिथि की समाप्ति: 10 जनवरी को दोपहर 02 बजकर 35 मिनट पर
आज आपके शहर में कब निकलेगा सकट चौथ का चांद
| शहर |
चांद निकलने का समय |
| दिल्ली |
20:41 |
| लखनऊ |
20:27 |
| वाराणसी |
20:22 |
| गाजियाबाद |
20:40 |
| बरेली |
20:32 |
| प्रयागराज |
20:26 |
| कानपुर |
20:30 |
| आगरा |
20:37 |
| मेरठ |
20:40 |
| पटना |
20:11 |
| रांची |
20:31 |
| भागलपुर |
20:23 |
| मधुबनी |
20:25 |
| गया |
20:31 |
| गुरुग्राम |
21:01 |
| फरीदाबाद |
21:00 |
| सिरसा |
21:08 |
| जांलधर |
21:04 |
| चंडीगढ़ |
20:59 |
| अमृतसर |
21:06 |
| इंदौर |
21:11 |
| भोपाल |
21:04 |
| ग्वालियर |
20:58 |
सकट चौथ का महत्व
चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित होती है। इस दिन व्रत और पूजा-पाठ से भगवान गणेश जीवन में सभी तरह बाधाएं को दूर करते हैं। माघ महीने की सकट चौथ व्रत मुख्य रूप से महिलाएं संतान की लंबी आयु की कामना के लिए किया जाता है। ऐसी मान्यता है इस दिन व्रत रखने से सभी तरह के संकट खत्म हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। ऐसे मान्यता है भगवान गणेश ने माता पार्वती और भगवान शिव की परिक्रमा सकट चौथ के ही दिन की थी जिस कारण से इस व्रत का विशेष महत्व होता है।