Rishi Panchami 2023: आज यानी 20 सितंबर को ऋषि पंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। कहा जाता है कि ऋषि पंचमी के दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति का भाग्य पल भर में बदल जाता है। साथ ही पिछले व वर्तमान जीवन के सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिल जाती है। यह पावन पर्व मुख्य रूप से सप्तऋषियों को समर्पित है। धार्मिक कथाओं के अनुसार ये सात ऋषि- वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र और भारद्वाज हैं। मान्यता है कि ऋषि पंचमी के दिन गंगा नदी में स्नान करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है और सप्तऋषियों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ऐसे में चलिए जानते हैं सप्तर्षि कौन थे और इनका जन्म कैसे हुआ...
Rishi Panchami 2023: ऋषि पंचमी व्रत कल, जानिए पूजा विधि और महत्व
ऋषि कश्यप
ऋषि कश्यप पहला स्थान माना गया है। पौराणिक कथाओं अनुसार जब गणेश जी ने अगलासुर का अंत करने के लिए उसे निगल लिया था, तब पेट की जलन को शांत करने के लिए ऋषि कश्यप ने ही दूर्वा की गांठे बनाकर दी थी, जिससे गणेश जी के पेट की जलन शांत हुई थी।
अत्रि ऋषि
दूसरे स्थान पर ऋषि अत्रि हैं। कहा जाता है कि इनकी पत्नी अनुसूया थीं। वहीं इनके पुत्र का नाम दत्तात्रेय है। कथाओं के अनुसार, त्रेतायुग में जब प्रभु श्रीराम को वनवास मिला था, तब वे सीता जी और लक्ष्मण के साथ अत्रि ऋषि के आश्रम में आकर रूके थे।
भारद्वाज ऋषि
कहा जाता है कि ऋषि भारद्वाज ने महान ग्रंथों की रचना की थी। आयुर्वेद के ग्रंथ की रचना भी इन्होंने ही की थी। कौरवों और पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य भारद्वाज ऋषि के ही पुत्र थे।
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ऋषि विश्वामित्र
ऋषि विश्वामित्र ने गायत्री मंत्र की रचना की थी। ये भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के गुरु थे। विश्वामित्र ही श्रीराम और लक्ष्मण को सीता के स्वयंवर में ले गए थे।
ऋषि गौतम
ऋषि गौतम ये पांचवे ऋषि हैं। इनकी पत्नी अहिल्या थीं। गौतम ऋषि ने ही शाप देकर अहिल्या को पत्थर बना दिया था। वहीं भगवान राम के चरण स्पर्श से अहिल्या पुनः सही हो गई थीं।
जमदग्नि ऋषि
जमदग्नि को छठे ऋषि का स्थान दिया जाता है। परशुराम इन्हीं के पुत्र थे। कहा जाता है कि ऋषि जमदग्नि के कहने पर ही परशुराम ने अपनी माता रेणुका का सिर काट दिया था।
वशिष्ठ ऋषि
वशिष्ठ ऋषि को सातवां स्थान दिया जाता है। कहा जाता है कि राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न के त्रेतायुग में ये गुरू थे।