भगवद्गीता के दसवें अध्याय में भगवान कृष्ण मे अपनी 56 विशिष्ट विभूतियों का उल्लेख किया है। श्रीकृष्ण ने कहा है कि संवत्सर के महीनों में मार्गशीर्ष का महीना मैं हूं। इस माह को इतना महत्व क्यों है? दरअसल इस माह की शुक्ल एकादशी को श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था।
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लेकिन तब भी इस माह का महत्व रहा ही होगा, क्योंकि भगवान ने उसे अपना स्वरूप कहा। श्रीकृष्ण ने गोपियों से कहा था कि जो मनुष्य इस माह यमुना स्नान करते हैं वो उनके सबसे करीब होते हैं। कहते हैं कि इसी माह ऋषि कश्यप ने कश्मीर बसाया था। मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन चंद्र की पूजा करना अच्छा माना गया है।
चन्द्र यानि स्त्री जाति जैसे पत्नी बहन, बेटी या बुआ आदि को कुछ वस्त्र उपहार में देना अच्छा मानते हैं। महर्षि अत्रि और अनुसूया पुत्र दत्तात्रेय का जन्म मार्गशीर्ष पूर्णिमा को ही माना जाता है।
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इन्हें चौबीस गुरुओं से ज्ञान प्राप्त हुई थी। इस माह किया गंगा–स्नान, दान महापुण्य का लाभ देते हैं। ऊन और तुलसी, तुलसी की जड़ का उपयोग उत्तम कहा गया है। स्नान करते समय गायत्री मंत्र का जप करना चाहिए। इस माह विष्णु-लक्ष्मी की आराधना का बड़ा महत्व है। कई जगह लोग विष्णु-सहस्त्रनाम का पाठ करते हैं।