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Jagannath Rath Yatra 2026: रथ यात्रा से नीलाद्री बीजे तक, जानें जगन्नाथ यात्रा के हर दिन का महत्व

Thu, 16 Jul 2026 02:14 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Jagannath Rath Yatra 2026: जानें पुरी रथ यात्रा का पूरा शेड्यूल, 9 दिनों की प्रमुख परंपराएं, नबजौबन दर्शन से नीलाद्री बीजे तक सभी रस्मों और धार्मिक महत्व की पूरी जानकारी।
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जगन्नाथ रथ यात्रा - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी की विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भक्ति, परंपरा और आस्था का अद्भुत संगम है। मान्यता है कि इस दौरान भगवान जगन्नाथ स्वयं अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथों पर सवार होकर भक्तों के बीच आते हैं और उन्हें दर्शन देते हैं। वर्ष 2026 में यह पावन यात्रा 16 जुलाई से शुरू होगी और 27 जुलाई को नीलाद्री बीजे अनुष्ठान के साथ इसका समापन होगा। पुरी रथ यात्रा का उल्लेख प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। स्कंद पुराण के उत्कल खंड में भगवान जगन्नाथ की गुंडिचा यात्रा, रथारोहण और रथ दर्शन के महत्व का वर्णन किया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रथ यात्रा में शामिल होकर भगवान के रथ को खींचने और दर्शन करने से भक्तों को पुण्य की प्राप्ति होती है।

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Jagannath Rath yatra - फोटो : अमर उजाला

आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को ही क्यों निकलती है रथ यात्रा?
जगन्नाथ रथ यात्रा हर वर्ष आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को निकाली जाती है। ज्योतिष और धार्मिक परंपराओं में शुक्ल पक्ष को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना गया है। वहीं द्वितीया तिथि यात्रा, धार्मिक अनुष्ठान और नए कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ मानी जाती है। इसी कारण भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा इसी तिथि पर आयोजित की जाती है।
 

जगन्नाथ रथ यात्रा - फोटो : Adobe Stock

कैसे तय होता है रथ यात्रा का कार्यक्रम?
जगन्नाथ रथ यात्रा का पूरा कार्यक्रम वैदिक पंचांग, ओड़िया पंचांग (पंजी), श्रीमंदिर की प्राचीन नीतियों और धार्मिक परंपराओं के आधार पर तय किया जाता है। यात्रा से जुड़े प्रत्येक अनुष्ठान का अपना विशेष महत्व होता है और सभी रस्में निश्चित तिथि व समय के अनुसार पूरी की जाती हैं।

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जगन्नाथ रथ यात्रा - फोटो : Adobe Stock

रथ यात्रा का शेड्यूल 
15 जुलाई 2026, बुधवार – नबजौबन दर्शन
स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा एकांतवास में रहते हैं। इसके बाद भक्तों को पहली बार उनके नवयौवन स्वरूप के दर्शन होते हैं, जिसे नबजौबन दर्शन कहा जाता है।

16 जुलाई 2026, गुरुवार – भव्य रथ यात्रा
आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के अवसर पर भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा अपने-अपने भव्य रथों पर सवार होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर के लिए प्रस्थान करते हैं। यही दिन रथ यात्रा के मुख्य आरंभ का प्रतीक माना जाता है।

20 जुलाई 2026, सोमवार – हेरा पंचमी
गुंडिचा मंदिर में भगवान के प्रवास के दौरान हेरा पंचमी का आयोजन होता है। इस दिन माता लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ से मिलने गुंडिचा मंदिर आती हैं। यह परंपरा भगवान जगन्नाथ और माता लक्ष्मी के संबंधों को दर्शाती है।

23 जुलाई 2026, गुरुवार – संध्या दर्शन
गुंडिचा मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के विशेष संध्या दर्शन होते हैं। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

24 जुलाई 2026, शुक्रवार – बहुदा यात्रा
गुंडिचा मंदिर में प्रवास पूरा करने के बाद भगवान अपने रथों पर सवार होकर श्रीमंदिर की ओर वापसी करते हैं। इसे बहुदा यात्रा कहा जाता है।

25 जुलाई 2026, शनिवार – सुना बेषा
बहुदा यात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को सोने के आभूषणों से सजाया जाता है। इस भव्य स्वरूप को सुना बेषा कहा जाता है।

26 जुलाई 2026, रविवार – अधर पाना
इस दिन भगवान को विशेष मीठा पेय अर्पित किया जाता है, जिसे अधर पाना कहा जाता है। यह अनुष्ठान रथ यात्रा की महत्वपूर्ण परंपराओं में शामिल है।

27 जुलाई 2026, सोमवार – नीलाद्री बीजे
रथ यात्रा का अंतिम चरण नीलाद्री बीजे होता है। इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा विधि-विधान के साथ पुनः श्रीमंदिर के रत्न सिंहासन पर विराजमान होते हैं। इसी के साथ नौ दिवसीय जगन्नाथ रथ यात्रा का समापन होता है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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