आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को ही क्यों निकलती है रथ यात्रा?
जगन्नाथ रथ यात्रा हर वर्ष आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को निकाली जाती है। ज्योतिष और धार्मिक परंपराओं में शुक्ल पक्ष को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना गया है। वहीं द्वितीया तिथि यात्रा, धार्मिक अनुष्ठान और नए कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ मानी जाती है। इसी कारण भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा इसी तिथि पर आयोजित की जाती है।
कैसे तय होता है रथ यात्रा का कार्यक्रम?
जगन्नाथ रथ यात्रा का पूरा कार्यक्रम वैदिक पंचांग, ओड़िया पंचांग (पंजी), श्रीमंदिर की प्राचीन नीतियों और धार्मिक परंपराओं के आधार पर तय किया जाता है। यात्रा से जुड़े प्रत्येक अनुष्ठान का अपना विशेष महत्व होता है और सभी रस्में निश्चित तिथि व समय के अनुसार पूरी की जाती हैं।
रथ यात्रा का शेड्यूल
15 जुलाई 2026, बुधवार – नबजौबन दर्शन
स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा एकांतवास में रहते हैं। इसके बाद भक्तों को पहली बार उनके नवयौवन स्वरूप के दर्शन होते हैं, जिसे नबजौबन दर्शन कहा जाता है।
16 जुलाई 2026, गुरुवार – भव्य रथ यात्रा
आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के अवसर पर भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा अपने-अपने भव्य रथों पर सवार होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर के लिए प्रस्थान करते हैं। यही दिन रथ यात्रा के मुख्य आरंभ का प्रतीक माना जाता है।
20 जुलाई 2026, सोमवार – हेरा पंचमी
गुंडिचा मंदिर में भगवान के प्रवास के दौरान हेरा पंचमी का आयोजन होता है। इस दिन माता लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ से मिलने गुंडिचा मंदिर आती हैं। यह परंपरा भगवान जगन्नाथ और माता लक्ष्मी के संबंधों को दर्शाती है।
23 जुलाई 2026, गुरुवार – संध्या दर्शन
गुंडिचा मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के विशेष संध्या दर्शन होते हैं। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
24 जुलाई 2026, शुक्रवार – बहुदा यात्रा
गुंडिचा मंदिर में प्रवास पूरा करने के बाद भगवान अपने रथों पर सवार होकर श्रीमंदिर की ओर वापसी करते हैं। इसे बहुदा यात्रा कहा जाता है।
25 जुलाई 2026, शनिवार – सुना बेषा
बहुदा यात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को सोने के आभूषणों से सजाया जाता है। इस भव्य स्वरूप को सुना बेषा कहा जाता है।
26 जुलाई 2026, रविवार – अधर पाना
इस दिन भगवान को विशेष मीठा पेय अर्पित किया जाता है, जिसे अधर पाना कहा जाता है। यह अनुष्ठान रथ यात्रा की महत्वपूर्ण परंपराओं में शामिल है।
27 जुलाई 2026, सोमवार – नीलाद्री बीजे
रथ यात्रा का अंतिम चरण नीलाद्री बीजे होता है। इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा विधि-विधान के साथ पुनः श्रीमंदिर के रत्न सिंहासन पर विराजमान होते हैं। इसी के साथ नौ दिवसीय जगन्नाथ रथ यात्रा का समापन होता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।