इस्लाम धर्म को मनाने वालों के लिए उनका पवित्र महीना रमजान शुरू हो गया है। इस्लामी कैलेंडर के नौवें महीने को रमदान-अल-मुबारक यानी रमदान कहा जाता है। इस दौरान पूरे महीने दुनिया भर के मुसलमान रोजे रखते हैं।
रोजे के दौरान रोजेदार दिन भर कुछ भी नहीं खाते हैं और खुदा की इबादत करते हैं। रोजा हर मुसलमान के लिए एक फर्ज है। इस बार मुकद्दस रमजान का आखिरी रोजा सबसे ज्यादा वक्त का होगा। जिसकी अवधि 15 घंटे 42 मिनट होगी। सभी रोजों की अवधि पंद्रह घंटे पंद्रह मिनट से लेकर पंद्रह घंटे 42 मिनट के बीच रहेगी।
पिछले साल सबसे लंबा रोजा माह-ए-रमजान के बीच में पड़ा था। अगर चांद दिखा तो 17 मई से माह-ए-रमजान का आगाज हो जाएगा। मुस्लिम इलाकों में इसकी तैयारी भी शुरू हो गई। इस बार चौबीस घंटे में रोजेदारों को पौने सोलह घंटे भूखे प्यासे रहना होगा।
रमजान की शुरुआत 15 घंटे 15 मिनट के रोजे से होगी। जबकि आखिरी रोजे की अवधि 15 घंटे 42 मिनट की होगी। रमजान में आखिरी जुमा का खास महत्व है। आने वाले रमजान में अलविदा का रोजा 939 या 942 मिनट का हो सकता है। 17 मई से रमजान शुरू होने पर अलविदा आठ या पंद्रह जून को पड़ सकता है।