हिंदू धर्म में तृतीया तिथि को अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली तृतीया तिथि पर रंभा तृतीया या रंभा तीज का पर्व मनाया जाता है, जिसका विशेष महत्व सुहाग, सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन से जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने पर वैवाहिक जीवन में प्रेम और सामंजस्य बना रहता है। वहीं अविवाहित कन्याएं योग्य और मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं। भविष्यपुराण में रंभा तृतीया व्रत को पुण्यदायी और कष्टों का नाश करने वाला बताया गया है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक इस व्रत का पालन करने से सुख-समृद्धि, अखंड सौभाग्य और पारिवारिक खुशहाली का आशीर्वाद प्राप्त होता है। आइए जानते हैं रंभा तृतीया 2026 की सही तिथि, शुभ समय, पूजा-विधि और इससे जुड़े महत्वपूर्ण मंत्रों के बारे में।
"त्वं शक्तिस्त्वं स्वधा स्वाहा त्वं सावित्री सरस्वती।
पतिं देहि गृहं देहि सुतान् देहि नमोऽस्तु ते।।"
इस मंत्र का भाव है कि हे देवी! आप ही शक्ति, स्वाहा, स्वधा, सावित्री और सरस्वती स्वरूपा हैं। मुझे सुखी दांपत्य जीवन, समृद्ध गृहस्थ जीवन और संतान सुख प्रदान करें। आपको मेरा प्रणाम है।
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