फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Rambha Tritiya 2026: रंभा तीज आज , जानें संपूर्ण पूजन विधि और मंत्र

Wed, 17 Jun 2026 06:45 AM IST
Shweta Singh ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

रंभा तृतीया पर विधि-विधान से पूजा करने से सौभाग्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। जानें पूजा विधि और मंत्र।
विज्ञापन
रंभा तीज व्रत पूजा विधि - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हिंदू धर्म में तृतीया तिथि को अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली तृतीया तिथि पर रंभा तृतीया या रंभा तीज का पर्व मनाया जाता है, जिसका विशेष महत्व सुहाग, सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन से जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने पर वैवाहिक जीवन में प्रेम और सामंजस्य बना रहता है। वहीं अविवाहित कन्याएं योग्य और मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं। भविष्यपुराण में रंभा तृतीया व्रत को पुण्यदायी और कष्टों का नाश करने वाला बताया गया है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक इस व्रत का पालन करने से सुख-समृद्धि, अखंड सौभाग्य और पारिवारिक खुशहाली का आशीर्वाद प्राप्त होता है। आइए जानते हैं रंभा तृतीया 2026 की सही तिथि, शुभ समय, पूजा-विधि और इससे जुड़े महत्वपूर्ण मंत्रों के बारे में।

विज्ञापन


रंभा तीज कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का आरंभ 17 जून 2026 देर रात्रि 12:53 बजे होगा। यह तिथि 17 जून 2026 को रात 9:49 बजे तक रहेगी। हिंदू धर्म में व्रत और त्योहारों का निर्धारण प्रायः उदया तिथि के आधार पर किया जाता है। इसलिए इस वर्ष रंभा तीज (रंभा तृतीया) का व्रत 17 जून 2026, बुधवार को रखा जाएगा। इस दिन विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखेंगी, जबकि अविवाहित कन्याएं योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करेंगी।

रंभा तृतीया पूजा विधि

  • रंभा तृतीया के दिन ब्रह्म मुहूर्त या सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • इसके बाद घर के मंदिर या पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें और पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजा का संकल्प लें।
  • पूजा स्थल पर माता पार्वती के स्वरूप या प्रतिमा को स्थापित करें। संभव हो तो उन्हें सुंदर वस्त्र, आभूषण और फूलों से सजाएं।
  • श्रद्धापूर्वक माता का ध्यान करें और उनके विभिन्न स्वरूपों का स्मरण करते हुए पूजा आरंभ करें।
  • पूजा के दौरान "ॐ महाकाल्यै नमः", "ॐ महालक्ष्म्यै नमः" और "ॐ महासरस्वत्यै नमः" जैसे मंत्रों का जप करें।
  • देवी को पुष्प, अक्षत, धूप, दीप, चंदन, फल और नैवेद्य अर्पित करें।
  • धार्मिक मान्यता के अनुसार गंगा, यमुना, नर्मदा, सिंधु तथा अन्य पवित्र नदियों का स्मरण करते हुए उनका पूजन भी किया जाता है।
  • पूजा के दौरान श्रद्धा अनुसार हवन किया जा सकता है और देवी मंत्रों के साथ आहुति अर्पित की जा सकती है।
  • अंत में माता से सुख, सौभाग्य, उत्तम दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना करें।

प्रार्थना मंत्र

"त्वं शक्तिस्त्वं स्वधा स्वाहा त्वं सावित्री सरस्वती।

विज्ञापन

पतिं देहि गृहं देहि सुतान् देहि नमोऽस्तु ते।।"

इस मंत्र का भाव है कि हे देवी! आप ही शक्ति, स्वाहा, स्वधा, सावित्री और सरस्वती स्वरूपा हैं। मुझे सुखी दांपत्य जीवन, समृद्ध गृहस्थ जीवन और संतान सुख प्रदान करें। आपको मेरा प्रणाम है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

विज्ञापन

 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें