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Ramadan 2024: आज से शुरू हुआ रमजान का पाक महीना, देखें अपने शहर के हिसाब से सहरी-इफ्तार का समय

Tue, 12 Mar 2024 07:51 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Ramadan 2024 in India: सऊदी अरब में रमजान का चांद 10 मार्च को दिखाई दे चुका है, इसलिए वहां पहला रोजा 11 मार्च को रखा गया। सऊदी अरब के एक दिन बाद भारत और पाकिस्तान में रोजा रखा जाता है। ऐसे में भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश समेत अन्य देशों में 12 मार्च को पहला रोजा रखा जाएगा।
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रमजान 2024 - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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Ramadan 2024: आज यानी 12 मार्च से रमजान के पाक महीने की शुरुआत हो रही है। रमजान का पाक महीना इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार नौवां महीना होता है। इसे माह-ए-रमजान भी कहा जाता है। यह महीना चांद को देखकर निर्धारित किया जाता है। सबसे पहले सऊदी अरब में रमजान का चांद दिखाई देता है। सऊदी अरब में रमजान का चांद 10 मार्च को दिखाई दे चुका है, इसलिए वहां पहला रोजा 11 मार्च को रखा गया। सऊदी अरब के एक दिन बाद भारत और पाकिस्तान में रोजा रखा जाता है। ऐसे में भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश समेत अन्य देशों में 12 मार्च को पहला रोजा रखा जाएगा। तो चलिए जानते हैं भारत के अलग-अलग शहरों में पहले रोजे पर शहर का सहरी और इफ्तार का समय...
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रमजान 2024 का टाइम टेबल
रमजान की शुरुआत 12 मार्च 2024
शब-ए-कद्र 6 अप्रैल 2024
रमजान की समाप्ति 9 अप्रैल 2024
ईद-उल-फितर 10 अप्रैल 2024

अलग-अलग शहरों में पहले रोजे के लिए सहरी और इफ्तार का समय
शहर सहरी  इफ्तार
अहमदाबाद सुबह 05:38 बजे शाम 06:47 बजे
बेंगलुरु सुबह 05:19 बजे शाम 06:31 बजे
कोलकाता सुबह 04:35 बजे शाम 05:45 बजे
चेन्नई सुबह 05:08 बजे शाम 06:20 बजे
दिल्ली सुबह 05:18 बजे शाम 06:27 बजे
हैदराबाद सुबह 05:16 बजे शाम 06:26 बजे
कानपुर  सुबह 05:06 बजे शाम 06:15 बजे
मुंबई सुबह 05:38 बजे शाम 06:48 बजे
पुणे सुबह 05:34 बजे शाम 06:44 बजे
सूरत सुबह 05:38 बजे शाम 06:47 बजे
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क्या है सहरी?
रमजान माह में रोजाना सूर्य उगने से पहले खाना खाया जाता है। इसे सहरी नाम से जाना जाता है। सहरी करने का समय पहले से ही निर्धारित कर दिया जाता है। इस्लाम धर्म को मानने वाले सभी लोगों को रोजा रखना अनिवार्य माना जाता है। हालांकि बच्चों और शारीरिक रूप से अस्वस्थ लोगों को रोजा रखने के लिए छूट दी गई है।  

क्या है इफ्तार?
दिनभर बिना खाए-पिए रोजा रखने के बाद शाम को नमाज पढ़ी जाती है और खजूर खाकर रोजा खोला जाता है। यह शाम को सूरज ढलने पर मगरिब की अजान होने पर खोला जाता है। इसे इफ्तार के नाम से जाना जाता है। इसके बाद सुबह सहरी से पहले तक व्यक्ति कुछ भी खा पी सकता है। 
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