Ramadan 2020 Date : रमजान के पाक महीने में रोजा रखना और नमाज पढ़ना मुस्लिम समुदाय के लिए बहुत ही खास होता है। रमजान के महीने का इंतजार सभी को बहुत ही उत्साह और उमंग के साथ रहता है। रमजान के महीने में रोजा करीब एक महीने तक रखा जाता है। रमजान के आखिरी दिन ईद का त्योहार मनाया जाता है और एक दूसरों से गले मिलकर बधाईयां दी जाती हैं। रमजान के पूरे एक महीना में खुदा की इबादत की जाती है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार रमजान का यह महीना नौवां महीना माना जाता है। रमजान का पवित्र महीना चांद के दिखने के बाद आरंभ होगा। 23 अप्रैल को अगर आसमान में चांद दिखाई देगा तो इस बार रमजान 24 को नहीं तो 25 अप्रैल से शुरू होगा।
23 अप्रैल को चांद दिखाई देने पर पहला रोजा 24 अप्रैल की तारीख को रखा जाएगा। वहीं, अगर 23 अप्रैल को चांद दिखाई नहीं दिया तो अगले दिन यानी 24 अप्रैल को चांद दिखाई देने पर पहला रोजा 25 अप्रैल को होगा। इस बार पहला रोजा 15 घंटे 22 मिनट तक होगा।
रमजान का पहला दिन
सहरी का समय- सुबह 3 बजकर 55 मिनट
इफ्तार का समय- 6 बजकर 33 मिनट
रमजान का आखिरी दिन
आखिरी रोजे के सहरी का समय-सुबह 3 बजकर 29 मिनट
आखिरी रोजे के इफ्तार का समय- 6 बजकर 48 मिनट
सहरी
रमजान के दिनों में सुबह के समय में जब भोजन किया जाता है तो उसे सहरी कहते हैं। सहरी दिन में सूरज के निकलने से पहले किया जाता है। सेहरी करने को सुन्नत कहते है।
इफ्तार
दिनभर रोजा रखने के बाद शाम के समय जब सूरज डूब जाता है तब रोजा खोला जाता है इसे इफ्तार कहा जाता है।
रमजा की खास बातें
रमजान के पवित्र महीने में कुरान पढ़ा जाता है और अल्लाह को याद किया जाता है। रमजान के महीने में शब-ए-कद्र मनाई जाती है। इस दिन मुस्लिम समुदाय रात भर जागकर इबादत करते हैं। रमजान के पाक महीने मे पांचों वक्त की नमाज अदा की जाती है।रमजान के महीने में तीन अशरे होते है जिसमें पहला अशरा 1से10 दिन रहमत का अशरा का होता है। दूसरा अशरा 11से 20 दिन का होता है जिसमें गुनाहों की माफी का अशरा होता है। तीसरा अशरा 21 से 30 दिन जहन्नम की आग से खुद को बचाने का अशरा होता है।