भगवान राम का जन्म लेना और रावण का वध करना यह कोई सामान्य घटना नहीं है। इसके पीछे कई कारण थे जिनकी वजह से विष्णु को राम अवतार लेना पड़ा।
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अपनी मौत का कारण सीता को जानता हुआ भी रावण सीता का हरण कर लंका ले गया। असल में यह सब एक अभिशाप के कारण हुआ था।
रावण ने दी किसे युद्घ की चुनौति
यह अभिशाप रावण को भगवान राम के एक पूर्वज ने दिया था। इस संदर्भ में एक कथा है कि बल में अहंकार में रावण अनेकों राजा महाराजाओं को पराजित करता हुआ इक्ष्वाकु वंश के राजा अनरण्य के पास पहुंचा।
राजा अनरण्य और रावण के बीच भीषण युद्घ हुआ। ब्रह्मा जी के वरदान के कारण अनरण्य रावण के हाथों पराजित हुआ। रावण राजा अनरण्य का अपमान करने लगा।
अपने अपमान से क्रोधित होकर राजा अनरण्य ने रावण को अभिशाप दिया कि तूने महात्मा इक्ष्वाकु के वंशजों का अपमान किया है इसलिए मेरा शाप है कि इच्वाकु वंश के राजा दशरथ के पुत्र राम के हाथों तुम्हारा वध होगा।
ईश्वरीय विधान के अनुसार भगवान विष्णु ने राम रुप में अवतार लेकर इस अभिशाप को फलीभूत किया और रावण राम के हाथों मारा गया।