रामनवमी 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Social Media
धार्मिक पुराणों के अनुसार राजा दशरथ ने ऋषि श्रृंगी की सलाह से पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया, जिसके बाद उन्हें चार पुत्र रत्नों की प्राप्ति हुई थी। भगवान विष्णु ने सबसे बड़े पुत्र राम के रूप में जन्म लिया।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रभु श्री राम का जन्म चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पुनर्वसु नक्षत्र में कर्क लग्न में दोपहर के समय में हुआ था। उस समय अभिजीत महूर्त था। जब भगवान राम का जन्म हुआ जब पांच ग्रह अपने उच्च स्थान में उपस्थित थे। जो किसी साधारण मनुष्य के जन्म के समय नहीं होता है।
रामनवमी 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Social media
भगवान राम श्री हरि विष्णु के सातवें अवतार थे। इनका जन्म त्रेता युग में हुआ था इसलिए मानव रूप में पूजे जाने वाले ये पहले देवता हैं।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान राम ने ग्यारह हजार वर्षों तक राज किया था। यह युग राम राज्य कहलाता है।
रामनवमी 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : amr ujala
भगवान राम का जन्म इक्ष्वाकु वंश में हुआ था। पौराणिक कथा और धर्म शास्त्रों के अनुसार इस वंश की स्थापना भगवान सूर्य के पुत्र राजा इक्ष्वाकु के द्वारा की गई थी। इसी कारण भगवान राम को सूर्यवंशी भी कहा जाता है।
भगवान राम का नाम करण रघुवंशियों के गुरु ऋषि वशिष्ठ जी के द्वारा किया गया था। महाभारत में मिलने वाले वर्णन के अनुसार केवल तीन बार प्रभु श्री राम का नाम लेने से हजार देवताओं के नाम लेने के समान फल की प्राप्ति होती है।