ऐसे काम करता है ट्रस्ट
ट्रस्ट जिसे हिन्दी में न्यास कहते हैं। यह मंदिर कि एक प्रशासनिक बॉडी होती है। ट्रस्ट में चेयरमैन और सेक्रेटरी का पद होता है। चेयरमैन का चुनाव होता हैं। ट्रस्ट के सदस्यों को राज्य सरकार और केंद्र सरकार के द्वारा चुना जाता है। मंदिर ट्रस्ट को कानूनन चंदे की राशि का कोई टैक्स नहीं देना होता है। ट्रस्ट के फैसलों या किसी अन्य काम में सरकार कोई दखल नहीं देती है। ट्रस्ट अपना खर्च बोर्ड सदस्यों की सहमति से करता है। लेकिन राम मंदिर ट्र्स्ट में कुल 15 सदस्य होंगे, जिनमें 9 स्थायी और 6 सदस्य नॉमिनेटेड होंगे।
ऐसे बनेगा राम मंदिर ट्रस्ट
केंद्र सरकार को पहले राम मंदिर ट्रस्ट के प्रस्ताव को कैबिनेट की बैठक में लाना होगा, जहां ट्रस्ट का संविधान का खाका और उसके सदस्यों की जानकारी जैसी अहम चीजें बतानी होंगी। इस ट्रस्ट में कौन-कौन सदस्य होंगे, यह कैसे काम करेगा और राम मंदिर निर्माण कैसे होगा, ये सारी बातें कैबिनेट की बैठक में ही तय होंगी। वित्तीय शक्तियां भी इसी ट्रस्ट के पास होंगी और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के खर्च की पूरी निगरानी ट्रस्ट करेगा। ऐसे में केंद्र सरकार इस ट्रस्ट के लिए संसद में बिल भी ला सकती है।