5 अगस्त को अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। राम मंदिर भूमि पूजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिस्सा लेंगे। जहां पर मंदिर के नींव में ईंट रखकर निर्माण का शुभारंभ करेंगे। लेकिन राम मंदिर भूमि पूजन के मुहूर्त की तारीख को लेकर विवाद शुरू हो गया है। कई संतों ने भूमि पूजन के समय को अशुभ बता रहे हैं। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती 5 अगस्त को भूमि पूजन के समय को अशुभ बता रहे हैं। उनका मानना है भाद्रपद के महीने में किसी भी तरह का शुभ कार्य का शुभारंभ अच्छा नहीं माना जाता है। इसके अलावा कई धर्म गुरु भी इस मुहूर्त में राम मंदिर भूमि पूजन के मुहूर्त पर प्रश्न खड़ा कर रहे हैं। आइए जानते हैं आखिर राम मंदिर के भूमि पूजन के समय और मुहूर्त के लेकर क्यों विवाद पैदा हो रहा है।
1- 5 अगस्त को होना है राम मंदिर का भूमि पूजन
ट्रस्ट की बैठक में यह तय किया गया कि आगामी 5 अगस्त 2020 को राम मंदिर का नींव पूजन किया जाएगा जिसके बाद से मंदिर निर्माण की प्रक्रिया आरंभ हो जाएगी। 5 अगस्त के दिन दोपहर के 1 बजकर 15 मिनट पर मंदिर का भूमि पूजन किया जाएगा।
2- राम मंदिर भूमि पूजन में पीएम मोदी होंगे शामिल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 अगस्त को अयोध्या पहुंचकर राम मंदिर निर्माण का शिलान्यास और भूमि पूजन करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी के अलावा मंदिर आंदोलन से जुड़ें कई लोग राम मंदिर भूमि पूजन में हिस्सा ले सकते हैं।
3- भूमि पूजन के मुहूर्त को लेकर चल रहा विवाद
जब से मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन की तारीखों का एलान हुआ है तब स काशी के संतों और पंडितों के द्वारा निर्धारित की गई तारीख पर सवाल खड़े कर रहे हैं। कुछ संतों का मानना है कि मंदिर निर्माण के शुभारंभ का मुहूर्त सही नहीं है। संत भाद्रपद माह की 5 तारीख को अशुभ मान रहे हैं।
4- मुहूर्त को लेकर कौन खड़ा रहा है सवाल
ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं द्वारका शारदापीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने श्रीराम मंदिर के शिलान्यास के पांच अगस्त के मुहूर्त पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि कोई कार्य उत्तम काल खंड में शुरू किया जाता है। पांच अगस्त को दक्षिणायन भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि है। शास्त्रों में भाद्रपद मास में गृह-मंदिरारंभ निषिद्ध है।
शंकराचार्य ने कहा कि अभिजित मुहूर्त होने के कारण इसे शुभ मुहूर्त मानना भी सही नहीं है। मुहूर्त चिंतामणि के विवाह प्रकरण में बुधवार को अभिजित निषिद्ध है। कर्क के सूर्य में रहने तक सिर्फ श्रवण मास में शिलान्यास हो सकता है, भाद्रपद में नहीं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विद्वानों के अनुसार चातुर्मास में शुभ मुहूर्त का संयोग नहीं बन रहा है।
5- ज्योतिष परिषद की क्या है राय
वहीं काशी विद्वत परिषद के मंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि हरिशयनी एकादशी से देवोत्थान एकादशी के बीच विवाह आदि मंगल कार्य करने का निषेध माना जाता लेकिन पूजन आदि धार्मिक कार्यों पर रोक नहीं है। प्रो. रामनारायण द्विवेदी का कहना है कि भूमि पूजन स्वयं भगवान राम का है ऐसे में मुहूर्त को लेकर कोई खास महत्व नहीं है।
6- भूमि पूजन का कैसा होगा धार्मिक आयोजन
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मुताबिक मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन का आयोजन तीन दिनों तक चलेगा। रक्षाबंधन के दिन ही भूमि पूजन का कार्यक्रम आरंभ हो जाएगा 5 अगस्त तक चलेगा।
7- भूमि पूजन की क्या होगी विधि
ट्रस्ट के द्वारा तय की 5 अगस्त की तारीख में मंदिर का भूमि पूजन किया जाएगा। दोपहर को अभिजीत मुहूर्त में सर्वार्थ सिद्धि योग में पूजा आरंभ हो जाएगी। कलश में कई पवित्र नदियों के जल और कई तीर्थ क्षेत्रों कि मिट्टी के साथ भूमि पूजन किया जाएगा। भूमि पूजन में मंदिर की नींव में लगभग 40 किलो चांदी की शिला का पूजन किया जाएगा। इसके अलावा चांदी की ईंट भी रख जाएगी।
8- राम मंदिर की क्या होगी विशेषता
राम मंदिर की ऊंचाई 161 फीट, लंबाई 268 फीट और चौड़ाई 140 फीट होगी। मंदिर में 212 खंभे होंगे और प्रत्येक खंभे में 16 मूर्तिया होगी। इसके अलावा भूतल में सिंहद्वार, गर्भगृह, नृत्यद्वार और रंगमंडप होगा। मंदिर के प्रथम तल पर राम दरबार की मूर्तिया रखी जाएगी। 45 एकड़ में रामकथा कुंज भी होगा। मंदिर में 5 गुंबद बनाया जाएगा।