फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रक्षाबंधन पर रहेगा चंद्र ग्रहण का साया, भारत में नहीं दिखेगा ग्रहण, जानिए इससे जुड़ी खास बातें

Thu, 20 Aug 2026 04:39 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

इस वर्ष रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण का साया रहेगा। लेकिन भारत में ग्रहण नहीं दिखाई देगा जिसके कारण इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा।
विज्ञापन
रक्षाबंधन पर चंद्रग्रहण का साया - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

28 अगस्त, शुक्रवार को रक्षाबंधन है और इस दिन श्रावण महीने की आखिरी तिथि पूर्णिमा है। इस तिथि पर आंशिक चंद्र ग्रहण भी लगेगा। लेकिन इस ग्रहण को भारत में नहीं देखा जा सकेगा जिसके कारण इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। भारत में ग्रहण नहीं दिखाई देने के कारण रक्षाबंधन पर राखी बांधने में किसी भी तरह की कोई बाधा नहीं आएगी।  हिंदू पंचांग के अनुसार रक्षाबंधन का पर्व हर साल श्रावण पूर्णिमा पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह करीब 9 बजकर 08 मिनट पर शुरू होगी, जिसका समापन 28 अगस्त को सुबह 9 बजकर 48 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि तिथि के आधार पर रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को मनाया जाएगा। इस बार रक्षाबंधन पर साया नहीं रहेगा, जिसके कारण पूरे दिन राखी बांधी जा सकती है। 

विज्ञापन


कब है चंद्र ग्रहण
साल 2026 का आखिरी चंद्र ग्रहण  28 अगस्त को लगेगा। जो आंशिक चंद्र ग्रहण होगा और यह भारतीय समय अनुसार सुबह करीब 08 बजकर 04 मिनट पर शुरू होगा और लगभग 11 बजकर 22 मिनट पर खत्म होगा। यह ग्रहण यूरोपस पश्चिमी एशिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, प्रशांत महासागर, हिंद महासागर और अंटार्कटिका के क्षेत्र में दिखाई देगा। साल के इस आखिरी चंद्रग्रहण में पृथ्वी की छाया चंद्रमा के लगभग 93 प्रतिशत हिस्से पर पड़ेगी। भारत में ग्रहण के दौरान चंद्रमा आकाश के नीचे होगा जिससे कारण इसे प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा जा सकेगा। चंद्र ग्रहण पर सूतक काल 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है। जिसमें भगवान की पूजा, मंदिरों के कपाट और शुभ कार्य करना वर्जित हो जाता है। 
लेकिन इस वर्ष भारत में चंद्र ग्रहण नहीं दिखाई देगा जिससे कारण इसका सूतककाल प्रभावी नहीं होगा। 

रक्षाबंधन पर रक्षासूत्र बांधने का महत्व 
हिंदू धर्म में रक्षाबंधन को एक प्रमुख त्योहार माना जाता है। इस दिन बहनें अपने भाईयों की कलाईयों पर राखी यानी रक्षासूत्र बांधती हैं और सुख जीवन की कामना करती हैं। वहीं भाई बहन की रक्षा और देखभाल करने का वचन देता है। रक्षाबंधन पर भाईयों की कलाईयों पर राखी से साथ रोली या कुमकुम से तिलक करती हैं, आरती उतारती हैं और मिठाई खिलाती हैं। फिर भाई बहन को उपहार देता है। 
विज्ञापन


रक्षाबंधन त्योहार के पीछे कई तरह की पौराणिक मान्यताएं हैं जिसमें एक कथा भगवान कृष्ण और द्रौपदी से जुड़ी हुई है वहीं दूसरी कथा का संबंध मां लक्ष्मी और राजा बली से है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार भगवान श्रीकृष्ण की उंगली से रक्त की बूंदे गिरने लगी थी, तब द्रोपदी ने अपने वस्त्र को फाड़कर एक टुकड़ा बांध दिया था। वही दूसरी कथा में राजा बलि और मां लक्ष्मी का प्रसंग है। अपने वरदान के कारण भगवान विष्णु राजा बलि के यहां पाताल लोक में निवास करने लगे थे, तब माता लक्ष्मी ने राजा बलि को रक्षा सूत्र बांध कर उन्हें अपना भाई बनाया था। इसके बाद राजा बलि ने भगवान विष्णु को अपने धाम लौटने का आग्रह किया था।

Budh Gochar: सिंह राशि में बुध के गोचर से बनेगा बुधादित्य राजयोग, बदलेगी इन 6 राशियों की किस्मत

 डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें