सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर करें मनन और संकल्प
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सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर करें मनन और संकल्प
रक्षाबंधन के दिन सूर्योदय से पहले शुद्ध स्नान अवश्य करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद मन, वचन और कर्म से “भ्रातृरक्षा सूत्र-बंधनम् करिष्ये” का संकल्प लें। यह संकल्प राखी के आध्यात्मिक महत्व को जागृत करता है और भाई की रक्षा का दृढ़ संकल्प बनाता है।
राखी को गंगाजल या गाय के घी से पवित्र करें
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राखी को गंगाजल या गाय के घी से पवित्र करें
राखी बांधने से पहले उसे गंगाजल या शुद्ध गाय के घी में हल्का सा छूकर पवित्र करें। इससे राखी में दिव्य ऊर्जा का संचार होता है, जो बुरी नजर, दुर्भाग्य और संकटों से भाई की रक्षा करता है।
तिलक लगाते समय रक्षा मंत्र का उच्चारण करें
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तिलक लगाते समय रक्षा मंत्र का उच्चारण करें
भाई के माथे पर तिलक लगाते समय निम्न रक्षा मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ होता है:
“येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबलः
तेन त्वां प्रतिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल”
यह मंत्र अदृश्य शक्तियों से रक्षा करता है और भाई को लंबी आयु और सफलता प्रदान करता है।
पूजन थाली में अक्षत, दूर्वा, रोली और फूल अवश्य रखें
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पूजन थाली में अक्षत, दूर्वा, रोली और फूल अवश्य रखें
राखी की थाली में अक्षत (चावल), दूर्वा, रोली, चंदन और रंग-बिरंगे फूल रखें। ये पंचोपचार सामग्री भगवान की पूजा के समान पूजनीय हैं और भाई को आध्यात्मिक शक्ति, बुद्धि और सफलता का वरदान देती हैं।
राखी बांधने के बाद गौ माता या ब्राह्मण सेवा करें
राखी बांधने के बाद गौ माता या ब्राह्मण सेवा करें
राखी बांधने के बाद बहन अपने भाई के नाम से गौ सेवा, अन्नदान या ब्राह्मणों की पूजा करें। यह सेवा अत्यंत पुण्यकारी होती है और सात पीढ़ियों तक शुभ फल प्रदान करती है, जिससे परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।