फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pongal 2024: चार दिनों तक चलता है पोंगल पर्व, जानिए हर दिन का महत्व

Mon, 15 Jan 2024 10:22 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Pongal 2024 Date: पोंगल दक्षिण भारत के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है। ये मुख्य रूप से तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल में मनाया जाता है। मान्यता है कि दक्षिण भारत में फसल काटने के बाद लोग अपनी प्रसन्नता को प्रकट करने के लिए पोंगल का त्योहार मनाते हैं।
विज्ञापन
पोंगल 2024 - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Pongal 2024 Date: इस साल 15 जनवरी से पोंगल पर्व की शुरुआत हो रही है। इसका समापन 18 जनवरी को होगा। सूर्य के उत्तरायण होने पर उत्तर भारत में मकर संक्रांति या खिचड़ी मनाई जाती है। वहीं दक्षिण भारत में पोंगल का पर्व मनाया जाता है। पोंगल दक्षिण भारत के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है। ये मुख्य रूप से तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल में मनाया जाता है। मान्यता है कि दक्षिण भारत में फसल काटने के बाद लोग अपनी प्रसन्नता को प्रकट करने के लिए पोंगल का त्योहार मनाते हैं। इस दिन लोग समृद्धि लाने के लिए वर्षा, धूप, सूर्य, इंद्रदेव और खेतिहर पशुओं की पूजा करते हैं। ये पर्व पूरे चार दिनों तक चलता है। प्रत्येक दिन का अपना-अपना महत्व होता है। चलिए जानते हैं इन चार दिनों का महत्व और परंपरा...

विज्ञापन


Pongal 2024: इस साल कब से शुरू हो रहा है चार दिवसीय पोंगल पर्व, जानें इस पर्व से जुड़ी परंपरा और महत्व

पहला दिन
पोंगल पर्व के पहले दिन इंद्र देव की पूजा की जाती है। इस पूजा को भोगी पोंगल के नाम से जाना जाता है। इस दिन वर्षा के लिए इंद्र देव का आभार प्रकट करते हुए जीवन सुख और समृद्धि की कामना की जाती है। साथ ही दिन लोग अपने पुराने हो चुके सामानों की होली जलाते हुए नाचते हैं।
विज्ञापन


दूसरा दिन
दूसरे दिन को सूर्य पोंगल के तौर पर मनाया जाता है। इस पर्व के दूसरे दिन सूर्य देव की पूजा की जाती है। इस दिन सूर्य के उत्तरायण होने के बाद सूर्य देव का आभार प्रकट किया जाता है। साथ ही इस दिन एक खास तरह की खीर बनाई जाती है, जिसे पोंगल खीर कहा जाता है।

तीसरा दिन
तीसरे दिन पशुओं की पूजा होती है। इसे मट्टू पोंगल के नाम से जाना जाता है। इसमें लोग मट्टू यानी बैल की विशेष रूप से पूजा करते हैं। अपने पशुओं का आभार व्यक्त करने के लिए इस दिन गाय और बैलों को सजाया जाता है और उनकी पूजा की जाती है। साथ ही इस दिन बैलों की दौड़ का भी आयोजन किया जाता है, जिसे जलीकट्टू कहा जाता है।

Pongal 2024 Recipe: पोंगल पर तैयार करें चावल से बना ये खास व्यंजन, खाकर हर कोई होगा खुश

चौथा दिन
चौथा दिन पोंगल पर्व का आखरी दिन होता है। चौथे दिन को कन्या पोंगल के नाम से जाना जाता है। इस दिन घरों को फूलों और पत्तों से सजाया जाता है। आंगन और घर के मुख्य द्वार पर रंगोली बनाई जाती है। इसके बाद कन्या पूजन कर लोग एक-दूसरे को पोंगल की बधाइयां देते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें