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काशी विश्वनाथ की शरण में मोदी, जानिए मंदिर से जुड़ी कुछ अनसुनी बातें

Sat, 04 Mar 2017 05:49 PM IST
amarujala.com- Presented by: आकांक्षा सिंह
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज बनारस के मशहूर मंदिर और ज्योतिर्लिंग काशी विश्वनाथ में दर्शन के लिए जाएंगे। बनारस के इस मंदिर की हिंदू धर्म में अपनी खास विशेषता है। जानिए इस मंदिर से जुड़ी कुछ अहम बातें।
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काशी को भोले की नगरी कहा जाता है। कहते हैं कि यह शहर उनके त्रिशूल पर टिका है और सृष्टि के विनाश के बाद भी यहां कोई हानि नहीं होगी। यहीं गंगा किनारे स्थित है काशी विश्वनाथ का मंदिर। हिमालय को छोड़कर शिव ने इसे ही अपना स्थायी निवास बनाया था। यह शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से सबसे अहम है।

मंदिर के बारे में यह मान्यता है कि यहां मोक्ष की प्राप्ति होती है। सदियों से शिव भक्त यहां मोक्ष की तलाश में आते रहे हैं। भोले का यह मंदिर भक्तों के लिए सालभर खुला रहता है। गंगा में स्नान कर के मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की यहां भीड़ रहती है। मंदिर के ऊपर सोने के छत्र के बारे में कहा जाता है कि इसे देख कर जो भी भक्त सच्चे मन से कुछ मांगता है तो भोले बाबा उनकी मुरादें जरूर पूरी करते हैं।
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जानें क्या है मंदिर से जुड़ीं मान्यताएं

मंदिर के बारे में एक मान्यता यह भी है कि एक भक्त को शिव में सपने में दर्शन दिया था। सपने में उन्होंने भक्त से कहा कि उसे दो शिवलिंग मिलेंगे और उन्हें जोड़कर उसे इसकी स्थापना करनी होगी। शिव और शक्ति के इसी जोड़ को काशी विश्वनाथ कहा जाता है। लोग यह भी कहते हैं कि देवी मां ने शिव को यहां खुद स्थापित किया था।

कहा जाता है कि काशी विश्वनाथ में सोमवार को चढ़ाए गए जल का सबसे अधिक महत्व है। महाशिवरात्रि और सावन में भी जो यहां जल चढ़ता है, उसे मोक्ष जल्दी प्राप्त होता है।
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