पितृपक्ष में पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनकी तृप्ति के लिए श्राद्ध कर्म, तर्पण और पिंडदान का विशेष विधान है। शास्त्रों में श्राद्ध करने के अधिकारों को लेकर स्पष्ट नियम बताए गए हैं- पुत्र के प्रथम अधिकार से लेकर, बेटियां, बहुएं, नाती-भतीजे और सपिंड कब श्राद्ध कर सकते हैं? गरुड़ पुराण और मनुस्मृति के आधार पर जानिए श्राद्ध कर्म के शास्त्रीय नियम, पात्रता का सही क्रम और महिलाओं के अधिकार से जुड़ी सभी जरूरी बातें।
3. महिलाओं को श्राद्ध का अधिकार और नियम
शास्त्रों का प्रमाण: धर्मसिंधु, मनुस्मृति, गरुड़ पुराण तथा शंकराचार्यों की व्यवस्था के अनुसार महिलाओं को श्राद्ध, पिंडदान और अंतिम संस्कार में मुखाग्नि देने का पूर्ण अधिकार है।
परिस्थितियां:
- शैली प्रकाश
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