ज्योतिष शास्त्र में पितृ दोष को अत्यंत गंभीर माना गया है। यदि किसी जातक की जन्म कुंडली में पितृ दोष हो तो जीवन में बहुत विघ्न-बढ़ाएं आती ही रहती हैं दरअसल पितृ दोष पूर्व जन्म में किए गए पाप कर्मों का फल भी होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब कुंडली में सूर्य, गुरु, चंद्रमा, मंगल, शुक्र, बुध, शनि आदि की युति जब राहु के साथ बनती है अथवा राहु के साथ अन्य ग्रहों की युति बनती है तो पितृ दोष होता है। ऐसे में श्राद्ध पक्ष, जिसे पितृ पक्ष कहा जाता है, विशेष रूप से पितरों की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ समय माना गया है। इस दौरान किए गए उपाय शीघ्र फल देते हैं।
1. श्राद्ध और तर्पण करने से दूर होगा पितृदोष
पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म करना सबसे महत्वपूर्ण उपाय है। यदि संभव हो तो ब्राह्मण को बुलाकर श्राद्ध विधि से कराना चाहिए। श्राद्ध से पितरों की आत्मा तृप्त होती है और वे संतुष्ट होकर आशीर्वाद प्रदान करते हैं।इसके अलावा स्वयं भोजन करने से पहले अपने आहार में से कुछ हिस्सा गाय,कुत्ते और कौवे या अन्य पक्षी को जरूर दें।
2. पिंडदान करने से पितरों की आत्मा को मिलती है शांति
गया, वाराणसी, उज्जैन या हरिद्वार जैसे पवित्र तीर्थस्थलों पर पिंडदान करना पितृ दोष निवारण का प्रमुख उपाय है। धार्मिक मान्यता है कि पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष प्राप्त होता है और जातक का जीवन सुगम बनता है।
3. पितृ पक्ष के दौरान करें गरीबों को दान
श्राद्ध पक्ष में अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़ और दक्षिणा का दान करना चाहिए। विशेष रूप से गौ, कुत्ते, कौए और गाय-बछड़े को भोजन कराना पितरों को प्रसन्न करता है। यह कर्म पूर्वजों की आत्मा तक सीधा पहुंचता है।
4. पितृ पक्ष में पीपल की पूजा और जल अर्पण का महत्व
पितरों का वास पीपल वृक्ष में माना गया है। श्राद्ध पक्ष में प्रतिदिन पीपल के वृक्ष को जल अर्पित करें और सात परिक्रमा करें। साथ ही “ॐ पितृभ्यः नमः” मंत्र का जप करें। इससे पितृ दोष का प्रभाव कम होता है।
5. गीता और गरुड़ पुराण का पाठ करने मिलेगी पितरों की आत्मा को शांति
श्राद्ध पक्ष में धार्मिक ग्रंथों का पाठ विशेष पुण्यदायी माना गया है। गीता का पठन-पाठन और गरुड़ पुराण का श्रवण करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और जातक को जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
6. काले तिल और जल से तर्पण से पितृ दोष में आएगी कमी
पितृ दोष निवारण हेतु काले तिल, कुश और जल से पितरों का तर्पण करना चाहिए। इससे आत्माएँ तृप्त होकर आशीर्वाद देती हैं। शास्त्रों में इसे पितरों की कृपा प्राप्त करने का सबसे सरल उपाय माना गया है।
7. ब्राह्मण और गौ सेवा करने का महत्व
श्राद्ध पक्ष में ब्राह्मणों को भोजन कराना और दक्षिणा देना विशेष फलकारी है। साथ ही गौ-सेवा और गौ-दूध का दान करने से भी पितृ दोष का शमन होता है। इसे “पितृ तृप्ति का सर्वोत्तम साधन” बताया गया है।