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Pitru Paksha 2024: पितृपक्ष में चल रही है पैसों की तंगी, तो कम खर्च में श्रद्धाभाव से इस तरह करें श्राद्ध

Fri, 27 Sep 2024 07:20 AM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

यदि आप आर्थिक परेशानी के चलते किसी तीर्थ स्थल पर जाकर पितरों का श्राद्ध करने में सक्षम नहीं हैं, तो आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है। आप कुछ विशेष विधि का पालन करके घर पर भी कम खर्च में पितरों के निमित्त श्राद्ध कर सकते हैं।
 
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Pitru paksha 2024: कम खर्च में श्रद्धाभाव से इस तरह करें श्राद्ध - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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Pitru Paksha 2024: पितृपक्ष का समय पितरों के लिए समर्पित होता है। इस दौरान लोग मृत पितरों के निमित्त श्राद्ध कर्म आदि करते हैं। हिंदू धर्म में पितृपक्ष एक प्रचीन परंपरा है, जिसे करने से पितरों का आर्शीवाद मिलता है और जीवन में आने वाली सभी समस्याएं खत्म हो जाती है। तर्पण और श्राद्ध आदि करने से पितरों की आत्मा संतुष्ट होती है।

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पितरों के निमित्त श्राद्ध. पिंडदान या तर्पण करने के लिए पितृपक्ष के समय को सबसे उत्तम माना जाता है। पितृपक्ष की शुरुआत होते ही लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए और तीर्थस्थलों पर (जैसे गया जी, हरिद्वार, काशी, ऋषिकेश और प्रयागराज आदि) पहुंचने लगते हैं। माना जाता है कि तीर्थस्थलों में किए गए श्राद्ध से पितृ तृप्त होते हैं।

लेकिन अगर आप आर्थिक परेशानी के चलते किसी तीर्थ स्थल जाने के लिए सक्षम नहीं हैं, तो आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है। आप कुछ विशेष विधि का पालन करके घर पर ही पितरों के निमित्त श्राद्ध कर सकते हैं। सनातन धर्म की यही खूबसूरती है कि इसमें प्रत्येक वर्ग की हर परिस्थिति का ध्यान रखा जाता है और इसी के आधार पर नियम और व्यवस्थाओं का निर्धारण किया गया है। ऐसे में आइए जानते हैं धन के अभाव या विपन्नता पर कैसे करें पितरों का श्राद्ध कर्म...
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“तस्माच्छ्राद्धं नरो भक्त्या शाकैरपि यथाविधि।”
शास्त्रों के मुताबिक, अगर अन्न-वस्त्र के लिए धन का अभाव है, तो शाक यानी हरी सब्जियों से भी श्राद्ध कर्म किया जा सकता है। लेकिन यदि सब्जियों द्वारा भी श्राद्ध करना संभव न हो तो दक्षिणामुखी होकर दोनों भुजाओं को ऊपर ऊठाकर ये प्रार्थना करें।

प्रार्थना-
“न मेस्ति वित्तं धनं च नान्यच्छ्राद्धोपयोग्यं स्वपितृन्न्तो स्मि।
तृप्यन्तु भक्त्या पितरो मयैतौ कृतौ भुजौ वत्र्मनि मारुतस्य।।” (विष्णु पुराण)


इसका अर्थ है:- हे मेरे पितृरों! मेरे पास श्राद्ध कर्म के लिए न ही उपयुक्त धन है और न ही धान्य है। लेकिन मेरे पास आपके लिए अपार श्रद्धा-भक्ति का भाव है। इसलिए मैं इन्हीं के द्वारा आपको तृप्त करना का प्रयास कर रहा हूं। मैंने शास्त्रानुसार दोनों भुजाओं को आकाश में उठा रखा है और आपसे प्रार्थना कर रहा हूं।


 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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