फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पितृ पक्ष 2018: सिर्फ एक क्लिक से जानिए श्राद्ध की पूरी जानकारी

Mon, 24 Sep 2018 03:27 PM IST
ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव
विज्ञापन
पितृ पक्ष 2018
विज्ञापन
समयानुसार श्राद्ध करने से कुल में कोई दुखी नहीं रहता। पितरों की पूजा करके मनुष्य आयु, पुत्र, यश, स्वर्ग, कीर्ति, पुष्टि, बल, श्री, पशु, सुख और धन-धान्य प्राप्त करता है। देवकार्य से भी पितृकार्य का विशेष महत्व है। देवताओं से पहलेपितरों को प्रसन्न करना अधिक कल्याणकारी है। श्राद्ध शब्द श्रद्धा से बना है जो श्राद्ध का प्रथम अनिवार्य तत्व है अर्थात पितरों के प्रति श्रद्धा तो होनी ही चाहिए। आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से अमावस्या तक का समय श्राद्ध या महालय पक्ष कहलाता है। इस अवधि के सोलह दिन पितरों अर्थात श्राद्ध कर्म के लिए विशेष रूप से निर्धारित किये गए हैं। यही अवधि पितृ पक्ष के नाम से जानी जाती है।
विज्ञापन


पितृ पक्ष में किये गए कार्यों से पूर्वजों की आत्मा को शांति प्राप्त होती है तथा कर्ता को पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है। आत्मा की अमरता का सिद्धांत तो स्वयं भगवान श्री कृष्ण गीता में उपदेशित करते हैं। आत्मा जब तक अपने परमात्मा से संयोग नहीं कर लेती, तब तक विभिन्न योनियों में भटकती रहती है। और इस दौरान उसे श्राद्ध कर्म में संतुष्टि मिलती है। शास्त्रों में देवताओं से पहले पितरो को प्रसन्न करना अधिक कल्याणकारी कहा गया है। यही कारण है कि देवपूजन से पूर्व पितर पूजन किये जाने का विधान हैं। श्राद्धकर्म में कुछ विशेष बातों का इस वर्ष श्राद्ध पक्ष की शुरूआत 24 सितंबर 2018 से हो रही है।

श्राद्ध की तिथियां
पूर्णिमा तिथि-(नाना-नानी का श्राद्ध)
नवमी तिथि श्राद्ध - सौभाग्यवती श्राद्ध
दशमी तिथि - श्राद्ध माता के श्राद्ध
त्रयोदशी तिथि - सन्यासियों का श्राद्ध
चतुर्दशी तिथि श्राद्ध - शस्त्र-जल अग्नि-विषादि से मृतकों का श्राद्ध।

अमावस्या - चतुर्दशी तिथि में लोक छोड़ने वालों का श्राद्ध (सर्वपितृ श्राद्ध रखा जाता है, जैसे:- जिन व्यक्तियों की सामान्य मृत्यु चतुर्दशी तिथि को हुई हो, उनका श्राद्ध केवल पितृपक्ष की त्रयोदशी अथवा अमावस्या को किया जाता है।
विज्ञापन


जिन व्यक्तियों की अकाल-मृत्यु (दुर्घटना, सर्पदंश, हत्या, आत्महत्या आदि) हुई हो, उनका श्राद्ध केवल चतुर्दशी तिथि को ही किया जाता है।

सुहागिन स्त्रियों का श्राद्ध केवल नवमी को ही किया जाता है। नवमी तिथि माता के श्राद्ध के लिए भी उत्तम है।

संन्यासी पितृगणों का श्राद्ध केवल द्वादशी को किया जाता है। पूर्णिमा को मृत्यु प्राप्त व्यक्ति का श्राद्ध केवल भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा अथवा आश्विन कृष्ण अमावस्या को किया जाता है।

नाना-नानी का श्राद्ध केवलआश्विन शुक्ल प्रतिपदा को किया जाता है।

 

पितृ दोष के कारण

पितृ पक्ष 2018
पितृ दोष के कारण:

परिवार में किसी की अकाल मृत्यु होने से, अपने माता-पिता आदि सम्माननीय जनों का अपमान करने से, मरने के बाद माता-पिता का उचित ढंग से क्रियाकर्म और श्राद्ध न करने से, उनके निर्मित वार्षिक श्राद्ध न करने से पितरों का दोष लगता है। इसके फलस्वरूप परिवार में अशांति, वंश वृद्धि में रूकावट, आकस्मिक बीमारी, संकट, धन में बरकत न होना, सारी सुख सुविधाएं होते हुए भी मन असंतुष्ट रहना आदि पितृ दोष का कारण हो सकता है।

पितृ दोष कुंडली योग:
यदि किसी जातक की कुंडली में पितृदोष होता है तो उसे अनेक प्रकार की परेशानियां, हानियां उठानी पड़ती है। घर में कलह, अशांति रहती है। रोग-पीड़ाएं पीछा नहीं छोड़ती है। घर में आपसी मतभेद बने रहते हैं। कार्यों में अनेक प्रकार की बाधाएं उत्पन्न होती है। अकाल मृत्यु का भय बना रहता है। संकट, अनहोनियां, अमंगल की आशंका बनी रहती है। संतान की प्राप्ति में विलंब होता है। घर में धन का अभाव भी रहता है। अनेक प्रकार के महादुखों का सामना करना पड़ता है।

पितृदोष के लक्षण :

घर में आय की अपेक्षा खर्च बहुत अधिक होता है। घर में लोगों के विचार नहीं मिल पाते जिसके कारण घर मे झगडे होते रहते हैं। अच्छी आय होने पर भी घर में बरकत नहीं होती जिसके कारण धन एकत्रित नहीं हो पाता। संतान के विवाह में काफी परेशानियां और विलंब होता है। शुभ तथा मांगलिक कार्यों में काफी दिक्कते उठानी पड़ती है। अथक परिश्रम के बाद भी थोड़ा-बहुत फल मिलता है। बने-बनाए काम को बिगड़ते देर नहीं लगती।
 

पितृ पक्ष 2018
श्राद्ध के प्रकार:
नित्य – यह श्राद्ध के दिनों में मृतक के निधन की तिथि पर किया जाता है।

नैमित्तिक- किसी विशेष पारिवारिक उत्सव, जैसे-पुत्र जन्म पर मृतक को याद कर किया जाता है।

काम्य-यह श्राद्ध किसी विशेष मनौती के लिए कृत्तिका या रोहिणी नक्षत्र में किया जाता है।

श्राद्ध के अधिकारी:
पिता का श्राद्ध पुत्र को ही करना चाहिए। पुत्र के न होने पर पत्नी श्राद्ध कर सकती है। पत्नी न होने पर सगा भाई और उसके भी अभाव में संपिंडों को श्राद्ध करना चाहिए। एक से अधिक पुत्र होने पर सबसे बड़ा पुत्र श्राद्ध करता है। पुत्री का पति एवं पुत्री का पुत्र भी श्राद्ध के अधिकारी हैं। पुत्र के न होने पर पौत्र या प्रपौत्र भी श्राद्ध कर सकते हैं। पुत्र, पौत्र या प्रपौत्र के न होने पर विधवा स्त्री श्राद्ध कर सकती है। पत्नी का श्राद्ध व्यक्ति तभी कर सकता है, जब कोई पुत्र न हो। पुत्र, पौत्र या पुत्री का पुत्र न होने पर भतीजा भी श्राद्ध कर सकता है। गोद लिया पुत्र भी श्राद्ध का अधिकारी है।

श्राद्ध में महत्वपूर्ण बातें :
अपरान्ह का समय, कुशा, श्राद्धस्थली की स्वच्छता, उदारता से भोजन आदि की व्यवस्था और ब्राह्मण की उपस्थिति।

श्राद्ध के लिए उचित बातें - श्राद्ध के लिए उचित द्रव्य हैं  तिल, चावल, जौं, जल, मूल (जड़युक्त सब्जी) और फल।

तीन चीजें शुद्धिकारक हैं- पुत्री का पुत्र, तिल और नेपाली कम्बल।
 
तीन बातें प्रशंसनीय हैं- सफाई, क्रोधहीनता और चैन (हड़बड़ी व जल्दबाजी) का न होना।
विज्ञापन

पितृ पक्ष 2018
श्राद्ध के लिए अनुचित बातें -
कुछ अन्न और खाद्य पदार्थ जो श्राद्ध में प्रयुक्त नहीं होते-मसूर, राजमा, कोदों, चना, कपित्थ, अलसी, तीसी, सन, बासी भोजन और समुद्रजल से बना नमक। भैंस, हिरणी, ऊँटनी, भेड़ और एक खुरवाले पशु का दूध भी वर्जित है, पर भैंस का घी वर्जित नहीं है। श्राद्ध में दूध, दही और घी पितरों के लिए विशेष तुष्टिकारक माने जाते हैं। श्राद्ध किसी दूसरे के घर में, दूसरे की भूमि में कभी नहीं किया जाता है। जिस भूमि पर किसी का स्वामित्व न हो, सार्वजनिक हो, ऐसी भूमि पर श्राद्ध किया जा सकता है।

श्राद्ध विधि:
सुबह उठकर स्नान कर देव स्थान व पितृ स्थान को गाय के गोबर से लिपकर व गंगाजल से पवित्र करें। घर आंगन में रंगोली बनाएं। महिलाएं शुद्ध होकर पितरों के लिए भोजन बनाएं। श्राद्ध का अधिकारी श्रेष्ठ ब्राह्मण (या कुल के अधिकारी जैसे दामाद, भतीजा आदि) को न्यौता देकर बुलाएं। ब्राह्मण से पितरों की पूजा एवं तर्पण आदि कराएं। पितरों के निमित्त अग्नि में गाय का दूध, दही, घी एवं खीर अर्पित करें। गाय, कुत्ता, कौआ व अतिथि के लिए भोजन से चार ग्रास निकालें। ब्राह्मण को आदरपूर्वक भोजन कराएं, मुखशुद्धि, वस्त्र, दक्षिणा आदि से सम्मान करें। ब्राह्मण स्वस्तिवाचन तथा वैदिक पाठ करें और गृहस्थ एवं पितर के प्रति शुभकामनाएं व्यक्त करें। पितृ पक्ष में अपने पितरों के निमित्त जो अपनी शक्ति सामथ्र्य के अनुरूप शास्त्र विधि से श्रद्धापूर्वक श्राद्ध करता है, उसके सकल मनोरथ सिद्ध होते हैं, और घर, परिवार व्यवसाय तथा आजीविका में हमेशा उन्नति होती है।

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें