सनातन परंपरा में भगवान शिव की पूजा के अनेक रूप वर्णित हैं, जिनमें से पार्थिव शिवलिंग की पूजा को सर्वोच्च माना गया है। सावन माह में यह पूजा व्यक्ति को मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक बल प्रदान करती है। यह एक ऐसा साधन है जिससे साधक भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त कर सकता है और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि ला सकता है।
पार्थिव शिवलिंग पूजा का पौराणिक आधार
शास्त्रों और पुराणों में पार्थिव शिवलिंग की पूजा का उल्लेख अनेक प्रसंगों में मिलता है। मान्यता है कि प्रभु श्रीराम ने लंका विजय से पूर्व भगवान शिव की पार्थिव पूजा की थी। कलियुग में कूष्माण्ड ऋषि के पुत्र मंडप ने सबसे पहले पार्थिव शिवलिंग की स्थापना कर शिव उपासना की, जिसके बाद यह परंपरा जन-जन में प्रचलित हो गई। लिंग पुराण के अनुसार, शनिदेव ने भी काशी में पार्थिव शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की आराधना की थी जिससे उन्हें अपने पिता सूर्यदेव से अधिक बल प्राप्त हुआ।
पार्थिव शिवलिंग की पूजा से मिलने वाले फल
लिंग पुराण और शिवपुराण में वर्णित है कि जो भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक पार्थिव शिवलिंग की पूजा करता है, उसे जीवन में सुख, शांति, यश और धन की प्राप्ति होती है। पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष मार्ग सुलभ होता है। जिन दंपतियों को संतान सुख नहीं मिल रहा हो, उन्हें सावन में पार्थिव शिवलिंग की पूजा का विशेष लाभ मिलता है। इसी प्रकार, जिन कन्याओं का विवाह विलंब से हो रहा हो, वे यह पूजा करके योग्य जीवनसाथी प्राप्त कर सकती हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि इस पूजन से अकाल मृत्यु का भय भी दूर हो जाता है।
पार्थिव शिवलिंग निर्माण की विधि
पार्थिव शिवलिंग बनाने के लिए किसी नदी, तालाब या तीर्थ स्थान की शुद्ध मिट्टी लें। उसमें गंगाजल, पंचामृत, गोमय (गाय का गोबर) और भस्म मिलाकर गूंथ लें। यदि संभव हो तो गंगा नदी की मिट्टी सर्वोत्तम मानी जाती है। शिव मंत्रों का उच्चारण करते हुए पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके शिवलिंग का निर्माण करें। ध्यान रहे कि शिवलिंग की ऊँचाई 12 अंगुल (लगभग 9 इंच) से अधिक न हो।
पूजा की विधि और सामग्री
शिवलिंग को पहले गंगाजल या शुद्ध जल से स्नान कराएं। फिर पंचामृत से अभिषेक करें, जिसमें दूध, दही, घी, शहद और शक्कर सम्मिलित हो। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, आक, सफेद पुष्प आदि अर्पित करें। धूप-दीप जलाकर भगवान शिव की आरती करें और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें। अंत में चंदन से तिलक करें और नैवेद्य अर्पित करें।
सावन में पार्थिव पूजन का विशेष प्रभाव
श्रावण मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस माह में पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। यह साधना सरल होते हुए भी अत्यंत प्रभावशाली मानी गई है, जिससे साधक को लौकिक और पारलौकिक दोनों प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती हैं।