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परशुराम जयंती पर सूर्यास्त तक मौन धारण करना कितना जरूरी?

Fri, 28 Apr 2017 12:40 PM IST
amarujala.com- Presented by: किरण सिंह
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भगवान परशुराम
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देशभर में आज धूमधाम से भगवान परशुराम जयंती मनाई जा रही है। वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की रात्रि के प्रथम प्रहर में  भगवान विष्‍णु के आवेशावतार परशुराम का जन्म हुआ था। इसीलिए यह प्रदोष व्यापिनी ग्राह्म होती है। यदि दो दिन तक प्रदोष व्यापिनी हो तो दूसरे दिन व्रत करना चाहिए। जानें पूजा करने का सही तरीका 
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सूर्यास्त तक रहे मौन

व्रत वाले दिन स्नान करके संकल्प लें और सूर्यास्त तक मौन धारण करना चाहिए। शाम को वापस स्नान करने के बाद भगवान परशुराम की पूजा करें और अर्घ्य देकर रातभर श्रीराम मंत्र का जाप करें। 

भीष्म को नहीं हरा पाए थे 

महाभारत के अनुसार भीष्म परशुराम के ही शिष्य थे। जब भीष्म काशीराज की बेटियों अंबा, अंबिका और अंबालिका को अपने छोटे भाई वित्रिकार्य के उठा लाए थे तो अंबा राजा शाल्व के प्रेम को जानकर उन्होंने अंबिका को छोड़ दिया, लेकिन इसके बाद राजा शाल्व में उन्हें स्वीकार नहीं किया। जब अंबा ने परशुराम को ये पूरी बात बताई तो भगवान परशुराम ने भीष्म को अंबा से विवाह करने को कहा। भीष्म के मना करने के बाद गुरु व शिष्य के बीच युद्घ हुआ। हालांकि भगवान परशुराम ने अपने पितरों की बात सुनकर अपने अस्‍त्र रख दिए थे।
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