आज भाद्र शुक्ल एकादशी तिथि है। इस एकादशी का शास्त्रों में बड़ा महत्व बताया गया है। पुराणों में वर्णित कथाओं के अनुसार इस दिन चतुर्मास की अवधि में योगनिद्रा में सो रहे भगवान विष्णु करवट बदलते हैं।
इसलिए इसे परिवर्तनी एकादशी अथवा पद्मा एकादशी भी कहते हैं। इस वर्ष चतुर्मास का आरंभ 19 जुलाई से हुआ है और 13 नवंबर को समाप्त होगा।
पद्म पुराण में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि इस एकादशी के दिन विष्णु के वामन रूप की पूजा करनी चाहिए। क्योंकि भगवान इन चार महीनों में वामन रूप में पाताल में निवास करते हैं।
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जो लोग मोक्ष की चाहत रखते हैं उन्हें इस एकादशी का व्रत रखकर श्रद्घापूर्वक व्रत का पालन करना चाहिए। इस दिन भगवती लक्ष्मी की पूजा का भी विधान है क्योंकि परिवर्तनी एकादशी के दिन दिन इन्द्र सहित सभी देवताओं ने व्रत रखकर देवलोक पर पुनः अधिकार पाने के लिए देवी लक्ष्मी की पूजा की थी।
इस दिन देवी लक्ष्मी एवं वामन की पूजा करने से धन-धान्य की प्राप्ति होती है। इस व्रत से वाजपेयी यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता जिससे व्रती को मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है।