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अच्छे लोगों के ऐसे ही कर्मों से होता है नुकसान

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आप क्या सोचते है, अच्छा आदमी किसी को नुकसान नहीं पहुंचा सकता। दरअसल अच्छा अदमी समाज और दुनिया को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाता है। वैसे आप अच्छा या बुरा किसे कहेंगे।
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एक ही शादी पर टिका रहने वाला बुरा आदमी

वैसे आप अच्छा या बुरा किसे कहेंगे। ओशो कहते हैं बुरे आदमी को मैं, शराब पीता हो इसलिए बुरा नहीं कहता। शराब पीने वाले अच्छे लोग भी हो सकते हैं।

शराब पीने वाले बुरे लोग भी हो सकते हैं। बुरा आदमी इसलिए कहता, कि उसने किसी को तलाक देकर दूसरी शादी कर ली हो। दस शादी करने वाला भी अच्छा आदमी हो सकता है। एक ही शादी पर जन्मों तक टिका रहने वाला आदमी भी बुरा हो सकता है।

मैं बुरा आदमी आदमी उसको कहता हूं जिकसी मनोग्रंथि हीनता की है, जिसके भीतर इनफीरियॉरिटी का कोई बहुत गहरा भाव है। ऐसा आदमी खतरनाक है, क्योंकि ऐसा आदमी पद को पकड़ेगा, जो से पकड़ेगा, किसी भी कोशिश से पकड़ेगा, और किसी भी कीमत, किसी भी साधन का उपयोग करेगा। और किसी को भी हटा देने के लिए, कोई साधन उसे सही मालूम पड़ेगा।

अच्छे आदमी कर जाते हैं यह गलती

हिंदुस्तान में अच्छा आदमी वही है, जो न इनफीरियॉरिटी से पीड़ित है और न सुपीरियॉरिटी से पीड़ित है। अच्छे आदमी की मेरी परिभाषा है, ऐसा आदमी, जो खुद होने से तृप्त है, आनंदित है। जो किसी के आगे खड़े होने के लिए पागल नहीं है, और किसी के पीछे खड़े होने में जिसे अड़चन, कोई तकलीफ नहीं। जहां भी खड़ा हो जाए वहीं आनंदित है। ऐसा अच्छा आदमी राजनीति में जाए तो राजनीति शोषण न होकर सेवा बन जाती है।

लेकिन भारत का अच्छा आदमी हमेशा से देश और समाज को नुकसान पहुंचाता रहा है। क्योंकि हिंदुस्तान के अच्छे आदमी भगोड़े रहे हैं। हिन्दुस्तान ने उनको ही आदर दिया है जो भाग जाए। कोई भी नहीं जानता कि अगर बुद्घ ने राज्य न छोड़ा होता, तो दुनिया का ज्यादा हित होता या छोड़ देने से ज्यादा हित हुआ। गांधी जी ने भी देश को आजाद करवाया और आजदी के बाद खुद राजनीति से हट गए।

यह परंपरा है हमारी कि अच्छा आदमी हट जाए। लेकिन हम कभी नहीं सोचते कि अच्छा आदमी हटेगा तो जगह खाली नहीं रहेगी। खाली जगह को बुरा आदमी भर देता है। यही कारण है कि भारत की राजनीति में बुरे आदमी तीव्र संलग्नता से उत्सुक हैं।
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भारतीय राजनीति पर ओशो के विचार

पुस्तक परिचय
भारत की वर्तमान राजनीति और राजनैतिक व्यववस्था पर ओशो के प्रवचन और विचारों का संकलन है 'ओशो उद्घोष' नामक पुस्तक। इस पुस्तक का संपादन किया है स्वामी सत्य वेदांत ने। यह अंश उसी पुस्तक से लिया गया है।

भारतीय राजनीति पर ओशो के विचार और स्वस्थ भारत का मार्ग स्वस्थ राजनीति से कैसे तैयार किया जा सकता है इसका उल्लेख ओशो वर्ल्ड फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में किया गया है।
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