नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के मंदिरो में दर्शन के लिए भक्तों का तांता लग जाता है। नवरात्रि के दिनों में मां के 51 शक्तिपीठों का महत्व बहुत बढ़ जाता है। जब माता सती ने अपने पिता दक्ष के द्वारा शिव जी का अपमान किए जाने के कारण यज्ञकुंड में अपने प्राणों का त्याग कर दिया । तब दुखी होकर भगवान शिव माता सती के शरीर को लेकर तांडव करने लगे। जिससे सभी देवता गणों को सृष्टि की चिंता होने लगी। तब भगवान श्री हरि विष्णु ने शिव जी का मोह भंग करने के लिए अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर को कई हिस्सों में विभाजित कर दिया। जिन स्थानों पर माता सती के शरीर के भाग और आभूषण गिरे वहां पर शक्तिपीठ बन गए। इस तरह से कुल मिलाकर 51 शक्तिपीठों का उल्लेख मिलता है। इन शक्ति पीठों के दर्शन से ही भक्तों के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में मां के नयना या नैना देवीशक्ति पीठ स्थापित हैं यहां पर माता सती के नयन गिरे थे।