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Navratri 2020: जानिए मां के छिन्नमस्तिका की कथा, जब मां ने अपने रक्त से बुझाई अपनी सखियों की प्यास

Tue, 20 Oct 2020 11:03 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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chinnmasta mandir - फोटो : pinterst
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हर वर्ष में चार नवरात्रि आती हैं जिनमें से दो गुप्त और दो नवरात्रि साधारण जन के लिए होती है। इस समय 17 अक्तूबर से शारदीय नवरात्रि चल रही हैं। जिनमें मां के नौ स्परूपों का पूजन किया जाता है। इसी तरह से गुप्त नवरात्रि में मां की दस महाविद्याओं का पूजन किया जाता है। जिनमें मां छिन्नमस्तिका भी हैं। मां छिन्नमस्तिका दस महाविद्याओं में छठी विद्या कहलाती हैं। माता छिन्नमस्तिका का मंदिर रामगढ़ से 28 किलोमीटर की दूरी पर भैरवी और दामोदर नदियों के संगम पर स्थित है। नवरात्रि के दिनों में यहां पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। जानते हैं इस मंदिर के बारे में...

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छिन्नमस्तिका मंदिर में मां काली की प्रतिमा है जिसमें मां के दाएं हाथ में तलवार है तो बाएं हाथ में मां का कटा हुआ मस्तक है। शिलाखंड में मां के तीन नयन हैं। मां काली अपने बाएं पैर को आगे बढ़ाएं हुए कमल के पुष्प पर विराजित हैं। तो वहीं पर विपरीत अवस्था में कामदेव और रति शयन अवस्था में हैं इस मंदिर को 6000 वर्ष से भी पुराना बताया जाता  है। 
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देवी मां के इस दिव्य स्वरुप का वर्णन पौराणकि ग्रंथो में भी मिलता है।  मां काली के इस स्वरुप के विषय में एक पौराणिक कथा मिलती है जिसके अनुसार माता ने चंडी रुप धारण करके राक्षसों की अंत करके देवताओं को विजय दिलवाई थी। कहते हैं कि तब मां की सहायता करने वाली योगिनियों (सखियां) की रक्त पिपासा शांत नहीं हुई थी। जिसके बाद मां ने उनकी पिपासा (प्यास) को शांत करने के लिए अपना मस्तक काट दिया और अपने रक्त से उनकी पिपासा को शांति किया। तब से मां के इस स्वरुप को छिन्नमस्तिका के नाम से जाना जाता है। मां के यह स्वरुप दुष्टो के लिय भयंकर और संहारक है तो वहीं अपने भक्तों के लिए मां दयालु हैं।
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