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नवरात्रि 2018: ऐसा शक्तिपीठ जहां भक्तों को प्रसाद में मिलता है गीला कपड़ा, जानिए रोचक बातें

Sat, 13 Oct 2018 11:40 AM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
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navratri 2018
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नवरात्रि मां दुर्गा की उपासना का पर्व है। नवरात्रि के 9 दिनों तक भक्त बड़े ही श्रद्धा भाव से माता की आराधना में लीन रहते हैं। इस मौके पर लोग घर पर माता दुर्गा की विधिवत पूजा-अर्चना तो करते ही हैं साथ में  कई शक्तिपीठों के दर्शन भी करने जाते हैं। सभी 51 शक्तिपीठों में से कामाख्या शक्तिपीठ के दर्शन का विशेष महत्व है। यह ऐसा इकलौता शक्तिपीठ है जहां पर 10 महाविद्याएं काली, तारा, मातंगी, कमला, सरस्वती, धूमावती, भुवनेश्वरी, बगला, छिन्नमस्तिका और भैरवी एक ही स्थान पर विराजामान हैं। इस शक्तिपीठ में माता की योनि की पूजा होती है। आइए जानते हैं कामाख्या शक्तिपीठ से जुड़ी कुछ रहस्यमयी बातें...

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कामाख्या शक्तिपीठ
यह स्थान है कामरूप जिसे वर्तमान में असम के नाम से जाना जाता है।असम के नीलांचल पर्वत पर समुद्र तल से करीब 800 फीट की ऊंचाई पर यहां देवी का एक मंदिर है जिसे कामख्या देवी मंदिर कहते हैं। देवी के 51 शक्तिपीठों में से यह भी एक है। माना जाता है कि भगवान विष्णु ने जब देवी सती के शव को चक्र से काटा तब इस स्थान पर उनकी योनी कट कर गिर गयी।

यहां मूर्ति की नहीं योनि की होती है पूजा
इसी मान्यता के कारण इस स्थान पर देवी की योनि की पूजा होती है। हर साल तीन दिनों के लिए यह मंदिर पूरी तरह से बंद रहता है। माना जाता है कि माँ कामाख्या इस बीच रजस्वला होती हैं। और उनके शरीर से रक्त निकलता है। इस दौरान शक्तिपीठ की अध्यात्मिक शक्ति बढ़ जाती है। इसलिए देश के विभिन्न भागों से यहां तंत्रिक और साधक जुटते हैं। आस-पास की गुफाओं में रहकर वह साधना करते हैं।
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प्रसाद में मिलता है गीला कपड़ा
चौथे दिन माता के मंदिर का द्वार खुलता है। माता के भक्त और साधक दिव्य प्रसाद पाने के लिए बेचैन हो उठते हैं। यह दिव्य प्रसाद होता है लाल रंग का वस्त्र जिसे माता राजस्वला होने के दौरान धारण करती हैं। इसे अम्बुवाची वस्त्र कहते हैं। माना जाता है वस्त्र का टुकड़ा जिसे मिल जाता है उसके सारे कष्ट और आने वाली विपदा दूर हो जाती हैं।

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