बजरंगबली की पूजा करने से सभी तरह के संकटों और कष्टों से मुक्ति मिलती है।
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क्यों की जाती है हनुमान जी की पूजा?
माना जाता है कि नरक चतुर्दशी या काली चौदस की रात नकारात्मक ऊर्जाएं अधिक सक्रिय होती हैं। इसलिए बुरी नजर और नकारात्मक ऊर्जा से बचने के लिए हनुमान जी की शरण ली जाती है। हनुमान जी को संकट मोचन के रूप में भी जाना जाता है। बजरंगबली की पूजा करने से सभी तरह के संकटों और कष्टों से मुक्ति मिलती है। हनुमान जी की पूजा करने से व्यक्ति में शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूती आती है।
काली चौदस के दिन हनुमान जी की पूजा के पीछे भी एक कथा प्रचलित है जिसके अनुसार जब भगवान राम अपने चौदह वर्षीय वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे, तब उन्होंने हनुमान जी को वरदान दिया था कि उनसे पहले हनुमान जी की पूजा की जाएगी। इसीलिए दीवाली से एक दिन पहले हनुमान जी की पूजा की जाती है।
काली चौदस की रात हनुमान जी की पूजा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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काली चौदस की रात हनुमान जी की पूजा करने की विधि
- काली चौदस के दिन नित्य कर्मों से निवृत होकर स्नान कर लें।
- इसके बाद साफ़ सुथरे वस्त्र धारण कर लें।
- अब एक चौकी में लाल रंग का कपड़ा बिछाकर हनुमान जी की तस्वीर या मूर्ति रख लें।
- अब सबसे पहले पुष्प की मदद से जल से आचमन करें।
- इसके बाद अनामिका उंगली से हनुमान जी को रोली, कुमकुम आदि लगाएं।
- इसके बाद फूल माला आदि अर्पित करें।
- अब बूंदी के लड्डू या किसी अन्य मिठाई का भोग लगाएं।
- अब घी का दीपक और धुप जलाने के साथ विधिवत हनुमान चालीसा और मंत्र का पाठ करें।
- अंत में आरती करें ।
- काली चौदस की रात हनुमान जी की पूजा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।