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Nanda Saptami 2021: आज है नंदा सप्तमी, जाने इसका महत्व और पूजा विधि

Fri, 10 Dec 2021 11:11 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमरउजाला

सार

Nanda Saptami 2021: प्रत्येक वर्ष अगहन मास के शुक्ल पक्ष कि सप्तमी तिथि को नंदा सप्तमी के नाम से जाना जाता है। इस बार नंदा सप्तमी आज यानि 10 दिसंबर को है। नंदा देवी को माता पार्वती का स्वरुप माना जाता है।नंदा देवी नवदुर्गा में से एक हैं। नंदा सप्तमी के दिन जातक को सूर्य देव को जल अर्पित कर उनके मंत्र का जाप करनया चाहिए और गणेश जी की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। 
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nanda devi - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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प्रत्येक वर्ष अगहन मास के शुक्ल पक्ष कि सप्तमी तिथि को नंदा सप्तमी के नाम से जाना जाता है। इस बार नंदा सप्तमी आज यानि 10 दिसंबर को है। नंदा सप्तमी के दिन नंदा देवी, सूर्यदेव और भगवान गणपति की आराधना की जाती हैं। आइए जानते हैं नंदा सप्तमी की पूजा मुहूर्त, तिथि महत्व और पूजा विधि के बारे में- 

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नंदा सप्तमी मुहूर्त
सप्तमी तिथि आरंभ: 9 दिसंबर सायं 07: 53 मिनट से आरंभ
सप्तमी तिथि समाप्त: 10 दिसंबर सायं 07:09 मिनट पर (नंदा सप्तमी 10 दिसंबर को मनाई जाएगी।)

शुभ समय
अभिजीत मुहूर्त: प्रातः11:53 से दोपहर 12:35 मिनट तक 
विजय मुहूर्त:  दोपहर 01: 58 मिनट से दोपहर 02: 39 मिनट तक 
(दोनों ही मुहूर्त कार्यों के लिए शुभ ) 
राहुकाल: प्रातः10: 56 मिनट से दोपहर 12:14 मिनट तक (इस अवधि में पूजा न करें)

nanda devi (prateekatmak tasveer) - फोटो : अमर उजाला
नंदा सप्तमी का महत्व 
नंदा देवी को मां पार्वती का रूप माना जाता है और इसलिए नंदा सप्तमी के दिन नंदा देवी की पूजा-अर्चना की जाती है। नंदा सप्तमी के के दिन माता पार्वती से प्रार्थन कर सुखी जीवन की कामना करते हैं। नंदा सप्तमी के दिन भगवा गणेश और सूर्य देव की भी विधिवत पूजा करनी चाहिए और व्रत करना चाहिए। ऐसा करने से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और सभी प्रकार के दोषों से मुक्ति मिलती है। 
नारद पुराण में उल्लिखित है कि कश्यप ऋषि के तेज और अदिति के गर्भ से मित्र नाम के सूर्य प्रकट हुए थे जो वास्तव में भगवान विष्णु के दाहिनी आँख कि शक्ति मानी गई थी। इसलिए नंदा सप्तमी के दिन सूर्य के मित्र रूप की पूजा करके सात ब्राह्मणों को भोजन करवाना चाहिए और उन्हें दक्षिणा देनी चाहिए। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार ये मान्यता है कि सप्तमी तिथि के स्वामी सूर्य हैं इसलिए शुक्ल पक्ष की सप्तमी को उदयगामी सूर्य को जल चढ़ाने का विधान है। भविष्य पुराण में भी श्रीकृष्ण के पुत्र सांब द्वारा सूर्य पूजा करने का जिक्र है जिससे सांब को दिव्य ज्ञान प्राप्त हुआ था। 
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nanda devi (prateekatmak tasveer) - फोटो : अमर उजाला
नंदा सप्तमी की पूजा विधि
  • नंदा सप्तमी के दिन तांबे के कलश में जल, अक्षत और लाल रंग के पुष्प डालकर उदयगामी सूर्य को अर्घ्य दें। 
  • अर्घ्य देते समय ऊँ घृणि सूर्याय नम: मंत्र का जाप करें। 
  • अर्घ्य देने के उपरांत धूप और दीप से सूर्य देव की पूजा करें।
  • नंदा सप्तमी के दिन तांबे के बर्तन, पीले या लाल वस्त्र, गेहूं, गुड़, और लाल चंदन का दान करें। 
  • नंदा सप्तमी के दिन व्रत करें। जातक चाहें  तो एक समय फलाहार कर सकते हैं लेकिन व्रत के दौरान दिन भर नमक न खाएं। 
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