कहा जाता है कि पीपल के पेड़ की पूजा करना और उसकी परिक्रमा करने से शनि की पीड़ा झेलनी नहीं पड़ती। जो पेड़ भगवान शनि को निकल गया था आखिर शनि देव उस पर कैसे मेहबान हुए। कथाओं की मानें तो पीपल को भगवान शनि का वरदान मिला था। जानें पीपल के पेड़ को कैसे मिल गया शनि का वरदान
राक्षस बन रहे थे ऋषि मुनि के यज्ञ में बाधा
कथाओं की मानें तो अगस्त्य ऋषि दक्षिण दिशा में अपने शिष्यों के साथ गोमती नदी के तट पर गए और सत्रयाग की दीक्षा लेकर एक वर्ष तक यज्ञ करते रहे। उस समय स्वर्ग पर राक्षसों का राज था
राक्षसों ने बदला रूप
कैटभ नाम के राक्ष्ास ने पीपल का रूप लेकर यज्ञ में ब्राह्मणों को परेशान करना शुरू कर दिया और ब्राह्मणों को मारकर खा जाते थे। जैसे ही कोई ब्राह्मण पीपल के पेड़ की टहनियां या पत्ते तोड़ने जाता है तो राक्षस उनको खा जाते।