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Mohini ekadashi 2021: इस दिन रखा जाएगा मोहिनी एकादशी व्रत, जानिए महत्व, तिथि और पूजा विधि

Tue, 18 May 2021 04:14 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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मोहिनी एकादशी 2021(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : lord vishnu (demo pic)
हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह में दोनों पक्षों, कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को एकादशी का व्रत किया जाता है। सनातन धर्म में एकादशी को सभी व्रतों में श्रेष्ठ माना गया है। हर एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है लेकिन प्रत्येक एकादशी तिथि का अपना एक अलग महत्व होता है। वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मोहिनी एकादशी का व्रत किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया था इसलिए इस एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाता है। इस बार मोहिनी एकादशी व्रत 23 मई 2021 दिन रविवार को किया जाएगा। जानते हैं एकादशी व्रत का महत्व, शुभ मुहूर्त और व्रत विधि
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मोहिनी एकादशी 2021(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
मोहिनी एकादशी व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मोहिनी एकादशी का व्रत नियम और निष्ठापूर्वक करन से मनुष्य के पापों का अंत होता है और व्यक्ति धीरे धीरे मोहजाल से मुक्त होकर मोक्ष की ओर अग्रसर होता है। मोहिनी एकादशी के दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से कष्टों से मुक्ति प्राप्त होती है।
 
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मोहिनी एकादशी 2021(प्रतीकात्मक तस्वीर)
एकादशी शुभ मुहूर्त-
 
एकादशी तिथि आरंभ- 22 मई 2021 को दिन शनिवार सुबह 09 बजकर 15 मिनट से
 
एकादशी तिथि समाप्त- 23 मई 2021 को सुबह 06 बजकर 42 मिनट तक
 
पारणा मुहूर्त- 24 मई सुबह 05 बजकर 26 मिनट से सुबह 08 बजकर 10 मिनट तक
 
पारणा अवधि- 2 घंटे 44 मिनट 
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मोहिनी एकादशी 2021(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : lord vishnu
मोहिनी एकादशी व्रत की विधि
  • एकादशी व्रत के नियम दशमी तिथि यानी एकादशी से एक दिन पहले आरंभ हो जाते हैं। 
  • एकादशी व्रत करने वाले को दशमी तिथि को सूर्यास्त के बाद रात्रि का भोजन नहीं करना चाहिए और मध्याह्न समय में भी सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए।
  • एकादशी तिथि को प्रातः उठकर स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  • पूजा स्थल पर एक लकड़ी की चौकी पर स्वच्छ कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें।
  • अब भगवान नारायण का चंदन, अक्षत, पंचामृत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य और फल आदि से पूजन करें।
  • इसके बाद मोहिनी एकादशी व्रत कथा पढ़ें और आरती करें।
  • आरती करने के पश्चात भगवान विष्णु के समक्ष क्षमा याचना करें।
अगले दिन द्वादशी तिथि को प्रातः उठकर स्नान आदि करके पूजन करें और ब्राह्मण को भोजन करवाकर यथासंभव दान दक्षिणा देकर विदा करें और शुभ मुहूर्त में स्वयं भी व्रत का पारण करें।
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