Mauni Amavasya 2019 : माघ मास को आलोक मास भी कहा जाता है। इस विशिष्ट साधना काल की महिमा गोस्वामी तुलसीदास जी ने गाई है- “माघ मकर गत रवि जब होई, तीरथ-पतिहि आव सब कोई।”इन दिनों आने वाले हर पर्व के रूप-रंग निराले और अनोखे हैं। स्नान-दान का यह काल विशेष संयम और त्याग के दिव्य भाव जगाने की शुभ प्रेरणा देता है। ऋतु चक्र के परिवर्तन का यह स्नान पर्व तब मनाया जाता है, जब खेतों में फसल कट चुकी होती है और किसान अच्छी पैदावार के लिए प्रकृति को धन्यवाद देते हैं। लोक संस्कृति खुद को प्रकृति से अलग नहीं मानती, बल्कि उसे अपना प्रिय और आराध्य मानती है। वैदिक साहित्य में उल्लेख है कि हमारे ऋषि-मनीषी इस महीने में विभिन्न साधनाएं करते थे।
रामायण काल में तीर्थराज प्रयाग में महर्षि भारद्वाज का आश्रम और साधना आरण्यक था, जहां जिज्ञासु साधक एकत्रित होकर संगम तट पर एक मास तक कल्पवास करते थे। आज भी माघ मास में प्रयाग की पुण्यभूमि में लोग कल्पवास के लिए जुटते हैं। कुंभ पर्व पर इसकी रौनक देखते ही बनती है। इस महीने की प्रत्येक तिथि पवित्र मानी गई है, लेकिन मौनी अमावस्या माघ मास का प्रमुख पर्व है, जो कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाता है। माघ मास की शुक्ल पंचमी को वसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है।
सनातन धर्म में माघ माह में तीर्थराज प्रयाग के त्रिवेणी स्नान का विशिष्ट महत्व माना गया है। मान्यता है कि भृगु ऋषि के सुझाव पर व्याध्रमुख वाले विद्याधर और गौतम ऋषि द्वारा अभिशप्त इंद्र को भी माघ स्नान से ही मुक्ति मिली थी। आज नदियां बुरी तरह प्रदूषित हो रही हैं, सूख रही हैं, फिर भी आस्था तो देखिए कि पुण्य अर्जित करने हर स्नानपर्व पर बड़ी संख्या में उमड़ पड़ते हैं।