सावन में भगवान शिव के साथ-साथ मां गौरा पार्वती की भी आराधना की जाती है। इसके लिए सावन में पड़ने वाले मंगलवार के दिन मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। सावन का दूसरा मंगला गौरी व्रत 03 अगस्त को रखा जाएगा। मुख्य रूप से मंगला गौरी व्रत अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए व्रत रखा जाता है। इसलिए विवाहित महिलाएं सावन में इस व्रत को विधि-विधान के साथ रखती हैं। मां के समक्ष दीपक प्रज्वलित करें और धूप, नैवेद्य फल-फूल आदि से मां गौरी का पूजन किया जाता है। पूजा के अंत में मां गौरी की आरती कर प्रसाद बांटा जाता है। मान्यता है कि मंगला गौरी की आरती गाने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और मां गौरा का आशीर्वाद सदैव बना रहता है। मंगला गौरी आरती (Mangala Gauri Aarti lyrics in Hind) इस प्रकार है-
मंगला गौरी आरती
जय मंगला गौरी माता, जय मंगला गौरी माता
ब्रह्मा सनातन देवी शुभ फल दाता। जय मंगला गौरी...।
अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता,
जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता। जय मंगला गौरी...।
सिंह को वाहन साजे कुंडल है,
साथा देव वधु जहं गावत नृत्य करता था। जय मंगला गौरी...।
सतयुग शील सुसुन्दर नाम सटी कहलाता,
हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता। जय मंगला गौरी...।
शुम्भ निशुम्भ विदारे हेमांचल स्याता,
सहस भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाता। जय मंगला गौरी...।
सृष्टी रूप तुही जननी शिव संग रंगराताए
नंदी भृंगी बीन लाही सारा मद माता। जय मंगला गौरी...।
देवन अरज करत हम चित को लाता,
गावत दे दे ताली मन में रंगराता। जय मंगला गौरी...।
मंगला गौरी माता की आरती जो कोई गाता
सदा सुख संपति पाता।
जय मंगला गौरी माता, जय मंगला गौरी माता।।