जीवनचक्र हमेशा चलता रहता है। आप अभी जो हैं वह भले ही मृत्यु के बाद नहीं रहें लेकिन आप नहीं होंगे ऐसा नहीं है। क्योंकि संसार में जितने भी जीव में वह किसी न किसी रुप में हर युग हर समय में रहे हैं। यह अलग बात है कि आज आप मनुष्य हैं तो अगले जन्म में पशु हो सकते हैं।
यह भी संभव है कि आपको अपने कर्मों के कारण कुछ समय तक अशरीरी बनकर भटकना पड़े यानी आप भूत-प्रेम या पितर के रुप में मौजूद रहें। लेकिन यह क्रम कभी रुकता नहीं है। भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता में बताया भी है कि ऐसा कोई समय नहीं था जब मैं नहीं था या तुम नहीं थे। यह अलग बात है कि मुझे अपने हर जन्म का ज्ञान है लेकिन तुम्हें उनका ज्ञान नही है।
बस यही अंतर है नर में और नारायण में। लेकिन नर का मतलब यहां पुरुष से नहीं बल्कि मनुष्य और अन्य जीवों से है कि उन्हें अपने अगले पिछले जन्म का ज्ञान नहीं होता।
हां कभी कभी कुछ ऐसे मामले आ जाते हैं जब व्यक्ति को अपने पूर्वजन्म की बातें याद रहती हैं। और ऐसे कई मामले आपने पढ़ा या सुना होगा कि पूर्वजन्म में जो पुरुष था वह अगले जन्म में स्त्री रुप में जन्म लिया। इसका तीन कारण शास्त्रों में बताया गया है।