Mala Jaap Ke Niyam: हमारे शास्त्रों में जप-तप का विधान काफी पुराना है। माना जाता है कि भगवान का ध्यान करने और उनका नाम जपने से इंसान के कष्ट दूर हो जाते हैं। साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है। सदियों से ऋषि-मुनि जप-तप करके देवी-देवताओं को प्रश्न् करते आ रहे हैं। कहा जाता है कि जाप करते समय हाथ में माला का होना आवश्यक होता है। ध्यान लगाने के लिए मंत्रों के सही उच्चारण के साथ ही सही नियमों के साथ माला जपना भी जरूरी होता है। ज्यादातर मालाएं 108 मनके की होती हैं, जिनके खत्म होने तक मंत्र का जाप किया जाता है।
वेदों और पुराणों में माला जपने के कुछ नियम बताए गए हैं। यदि माला जाप करते समय इन बातों का ध्यान नहीं रखा जाता है, तो व्यक्ति को जाप का फल नहीं मिलता। साथ ही इसके अशुभ फल भी प्राप्त हो सकते हैं। इन नियमों का पालन करना शुभ होता है और इससे व्यक्ति को पूर्ण फल की प्राप्ति होती है। तो आइए जानते हैं माला जपने के नियम...
माला जाप करते समय रखें इन बातों का ध्यान
- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, माला के मनकों की संख्या बिल्कुल सही होनी चाहिए। माला में मनकों की संख्या 27, 54 या 108 ही होना चाहिए। ब्रहमांड में कुल 27 नक्षत्र होते हैं। इन्हीं नक्षत्रों से सृष्टि का संचालन होता है। हर ग्रह किसी न किसी नक्षत्र में होता है, जिसका प्रभाव हमारे व्यक्ति के जीवन में पड़ता है। हर नक्षत्र में चार चरण बताए गए है, जिनके हिसाब से ही माला जाप किया जाता है।
- शास्त्रों में बताया गया है कि जिस माला से आप जाप कर रहे हैं, उसका कोई भी मनका टूटा नहीं होना चाहिए। टूटी मनके वाली माला से जाप करने पर आपके जीवन में बुरा प्रभाव पड़ सकता है। टूटी हुई माला को सही करके या मनका को बदलकर ही जाप करें।
- कहा जाता है कि आप जिस भी माला से जाप कर रहे हैं, उसमें दो मनकों के बीच एक गांठ जरूर होना चाहिए। बिना गांठ वाली माला शुभ फल नहीं देती है और इसके अशुभ परिणाम भी मिल सकते हैं।
- शास्त्रों के मुताबिक, ध्यान रखें कि धारण की हुई माला से कभी जाप न करें। साथ ही जाप करने वाली माला को धारण भी नहीं करना चाहिए।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।