हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर भगवान महावीर की जन्म हुआ था। इसकी खुशी में जैन धर्म के लोग इस दिन महावीर जयंती के रूप में उत्सव मनाते है। 17 अप्रैल को महावीर जयंती मनाई जा रही है। महावीर जयंती के मौके पर देश के तमाम जैन मंदिरों में शोभा यात्राएं निकाली जाती है। एक राजपरिवार में पैदा हुए एक राजकुमार कैसे सारे ऐशो-आराम और वैभव को बहुत ही कम उम्र में त्यागकर संयासी का जीवन व्यतीत करने लगा। इस महावीर जयंती के अवसर आइए जानते हैं भगवान महावीर के जीवन से जुड़ी कई बातें....
- भगवान महावीर का जन्म ईसा से 540 वर्ष पहले बिहार के वैशाली के गांव कुंडग्राम में क्षत्रिय कुल था। इनके पिता का नाम सिद्धार्थ और माता का नाम त्रिशला था।
- भगवान महावीर के जन्म एक विशेष नक्षत्र और शुभ योग में होने राज्य में खुशहाली और उन्नति हुई थी जिसके कारण से उनका नाम वर्धमान रखा गया।
- स्वामी महावीर जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे। बहुत की कम उम्र में उन्होंने माया-मोह को त्यागकर सत्य की खोज में निकल पड़े।
- 12 साल की कठिन तपस्या करने के बाद भगवान महावीर को ज्ञान प्राप्त हुआ था।
- 12 साल की तपस्या में सिर्फ 349 बार ही भोजन किया।
- भगवान महावीर ने ज्ञान की प्राप्ति के बाद लोगो को सत्य और अहिंसा का पाठ पढाया था।
- भगवान महावीर ने जैन धर्म को पांच सिद्धांत दिए थे- सत्य , अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह और ब्रहम्चर्य का पालन।
- भगवान महावीर ने 72 साल की आयु में मोक्ष प्राप्त किया था।
- पहला उपदेश को सुनने के लिए देवी-देवता जुटे थे, लेकिन महावीर 66 दिनों तक मौन रहे। क्योंकि उनका उपदेश सुनने के लिए कोई योग्य श्रोता सभा में नहीं था।