भगवान शिव को शास्त्रों और पुराणों में परमेश्वर बताया गया है। शिव वह शक्ति हैं जो आदि और अनंत से परे हैं। लेकिन भगवान शिव ने मनुष्य को यह सौभाग्य प्रदान किया जिससे वह मनुष्यों के भगवान ही नहीं बल्कि उनके खास रिश्तेदार भी बन गए हैं।
शिव उत्तराखंड के अधिदेव माने जाते हैं साथ ही इन्हें उत्तराखंड में दामाद का स्थान प्राप्त है। यहां पौराणिक देव शिव की उपासना वैदिक होती है। कुछ स्थानीय देवी-देवताओं की आराधना यहां नृत्यमयी पद्धति यानी जागरों से होती है। विश्वास है कि अनुष्ठान विशेष में वाद्य यंत्रों और गाथाओं के साथ शिव और देवता प्रकट होते हैं।
भैरों या भैरव, बिनसर आदि के रूप में शिव यहां मानव पर अवतरित होते हैं। भैरवों के इन रूपों-काल, बाल, बटुक आदि के अलावा सत्यनाथ के रूप में भी यहां शिव उपास्य है। सत्यनाथ के उपासक नाथपंथी लोग होते हैं। घंटाकर्ण यानी घंडियाल को भी उत्तराखंड में शिव रूप में पूजा जाता है।