महाशिवरात्रि, अपने भीतर स्थित शिव को जानने का महापर्व है। वैसे हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि होती है, पर फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की शिवरात्रि का विशेष महत्व होने के कारण ही उसे महाशिवरात्रि कहा गया है। यह भगवान शिव की विराट दिव्यता का महापर्व है।
शिव के संग गौरी की भी हो पूजा
धार्मिक मान्यतानुसार भगवान शंकर इस दिन संपूर्ण शिवलिंगों में प्रवेश करते हैं। शिव मनुष्य जीवन में सुख संपत्ति, ऋद्धि-सिद्धि, बल-वैभव, स्वास्थ्य, निरोगता, दीर्घायु, लौकिक-पारलैकिक सभी शुभ फलों के दाता हैं। शक्ति का हर रूप शिव के साथ ही निहित है। इसलिए महाशिवरात्रि पर शिव और शक्ति की संयुक्त रूप से आराधना करनी चाहिए। शिवरात्रि को आसुरी शक्तियों पर विजय प्राप्त करने के लिए शिव और शक्ति का योग भी कहा गया है।
कुंवारी ही नहीं, सुहागिनों के भी आराध्य हैं शिव
महाशिवरात्रि का पावन दिन सभी कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर और विवाहित महिलाओं को अखंड सुहाग का वरदान दिलाने वाला सुअवसर प्रदान करता है। अगर विवाह में कोई बाधा आ रही हो, तो भगवान शिव और जगत जननी के विवाह दिवस यानी महाशिवरात्रि पर इनकी पूजा-अर्चना करने से मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं।
इस दिन व्रती को फल, पुष्प, चंदन, बिल्वपत्र, धतूरा, धूप, दीप और नैवेद्य से चारों प्रहर की पूजा करनी चाहिए। दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अलग-अलग तथा सबको एक साथ मिलाकर पंचामृत से शिव को स्नान कराकर जल से अभिषेक करें। चारों प्रहर के पूजन में शिव पंचाक्षर 'ओम् नमः शिवाय' मंत्र का जप करें। भव, शर्व, रुद्र, पशुपति, उग्र, महान, भीम और ईशान, इन आठ नामों से पुष्प अर्पित कर भगवान की आरती और परिक्रमा करें।
शिव के फलदायी मंत्र
शिव को पंचामृत से अभिषेक कराते हुए इस मंत्र का उच्चारण करें- ऊं ऐं ह्रीं शिव गौरीमव ह्रीं ऐं ऊं।
महिलाएं सुख-सौभाग्य के लिए भगवान शिव की पूजा करके दुग्ध की धारा से अभिषेक करते हुए निम्न मंत्र का उच्चारण करें। मंत्रः ऊं ह्रीं नमः शिवाय ह्रीं ऊं।
लक्ष्मी अपने `श्री' स्वरूप में अखंड रूप से केवल भगवान शिव की कृपा से ही जीवन में प्रकट हो सकती हैं।
अखंड लक्ष्मी प्राप्ति हेतु निम्न मंत्र की दस माला का जाप करें। मंत्रः ऊं श्रीं ऐं ऊं।
शादी में हो रही देरी दूर करने के लिए इस मंत्र के साथ शिव-शक्ति की पूजा करें। हे गौरि शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकरप्रिया। तथा मां कुरु कल्याणी कान्तकांता सुदुर्लभाम।।
पुत्र विवाह के लिए निम्न मंत्र का जप मूंगा की माला से पुत्र द्वारा करवाएं। पत्नी मनोरमां देहि मनोवृत्तानु सारिणीम्। तारिणीं दुर्गसंसार सागरस्य कुलोद्भवाम्।
संपूर्ण पारिवारिक सुख-सौभाग्य हेतु निम्न मंत्र का जाप भी कर सकते हैं। ऊं साम्ब सदा शिवाय नमः।।