महाशिवरात्रि 2021 समस्त देवों में रूद्र सर्वशक्तिमान हैं (प्रतीकात्मक तस्वीर)
पौराणिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि
''सर्वदेवात्मको रूद्र: सर्वे देवा: शिवात्मका:'' अर्थात समस्त देवों की आत्मा में रूद्र हैं और रूद्र की आत्मा में सभी देव हैं। रूद्र ही सर्वशक्तिमान हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान ब्रह्मा की उत्पत्ति हुई तो अपने जन्म का कारण का जानने के लिए भगवान विष्णु के पास पहुंचे थे। तब भगवान विष्णु ने कहा कि आपकी उत्पत्ति मेरी नाभि से हुई है लेकिन ब्रह्माजी यह मानने को तैयार ही नहीं थे। इसके बाद श्रेष्ठता को लेकर दोनो के मध्य युद्ध होने लगा। इस विवाद को सुलझाने के लिए भगवान शिव ने एक दिव्य ज्योति का रूप धारण कर लिया और उनसे उस लिंग का आदि और अंत ढूंढने को कहा। तब दोनों में यह तय हुआ कि जो भी इस लिंग का सिरा या अंत ढूंढ लेगा। वह श्रेष्ठ कहलाएगा।
इस तरह से ब्रह्मा जी हंस बनकर लिंग के आगे के भाग को ढूंढने लगे और विष्णुजी वराह बनकर लिंग के नीचे की ओर ढूंढने लगे परंतु हजारो वर्ष बीत जाने के बाद भी दोनों में से कोई भी देव लिंग का आदि और अंत न ढूंढ सका परंतु ब्रह्मा जी ने कहा कि उन्होंने लिंग का सिरा ढूंढ लिया है और उन्होंने केतकी के फूल को साक्षी के तौर पर पेश किया। इससे भगवान शिव नाराज हो गए। जिसके बाद उन्हें शांत करने के लिए विष्णु जी और ब्रह्मा जी दोनों नें लिंग का रूद्राभिषेक किया। तभी से रूद्राभिषेक की परंपरा आरंभ हुई।