शास्त्रों में माघ मास को पुण्य मास कहा गया है। इसमें भी माघ मास की पूर्णिमा तिथि का बड़ा महत्व है। इस वर्ष माघ मास की पूर्णिमा तिथि 3 फरवरी को है।
शास्त्रों में बताया गया है कि माघ मास की पूर्णिमा तिथि के दिन सोना, तिल, कंबल, पुस्तकें, पंचांग, कपास के वस्त्र और अन्नादि दान करने से अपार पुण्य की प्राप्ति होती है।
बड़े ही संयोग की बात है कि इस वर्ष माघ पूर्णिमा के दिन पुष्य नक्षत्र का संयोग बना है। साथ ही इस दिन सर्वार्थ सिद्घि योग। इस तरह का योग बड़ा ही दुर्लभ माना गया है।
शास्त्र कहते हैं कि यदि माघ पूर्णिमा के दिन पुष्य नक्षत्र हो तो इस दिन का पुण्य अक्षुण हो जाता है। यानी इस दिन किया गया पुण्य नष्ट नहीं होता।
माघ मास के बारे में यह भी कहा गया है कि इस दिन देवता पृथ्वी पर आते हैं। देवता मनुष्य रूप धारण करके प्रयाग में स्नान-दान आदि करते हैं और अपने लोक को लौट जाते हैं। इसके बाद से संगम तट पर गंगा यमुना और सरस्वती का जल स्तर कम होने लगता है।