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Laxmi Ji Ki Aarti: हर शुक्रवार को करें ये काम, धन की देवी मां लक्ष्मी का मिलेगा आशीर्वाद

Fri, 26 Apr 2024 11:29 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Maa Laxmi Ji Ki Aarti Lyrics: शुक्रवार का दिन धन की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित है। इस दिन देवी की विधि अनुसार पूजा करने से धन-वैभव की प्राप्ति होती है। 
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Maa Laxmi Ji Ki Aarti - फोटो : istock
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विस्तार
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Maa Laxmi Ji Ki Aarti Lyrics: शुक्रवार का दिन धन की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित है। इस दिन देवी की विधि अनुसार पूजा करने से धन-वैभव की प्राप्ति होती है। मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार का दिन बेहद शुभ है। इस दौरान कुछ लोग उपवास रखकर देवी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। बता दें, व्रत रखने से न केवल परेशानियों से छुटकारा मिलता बल्कि धन से जुड़ी समस्याओं का भी निवारण होता है। इसलिए हर शुक्रवार को मां देवी की पूजा करनी चाहिए। इस दौरान लक्ष्मी जी के स्थान की सफाई का खास ध्यान रखें। उनके पवित्र स्थान  को गंगाजल से शुद्ध करना न भूलें। इस दौरान पूजा में की जाने वाली आरती का विशेष महत्व है।

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किसी भी देवी-देवता को प्रसन्न करने के लिए उनकी आरती करना जरूरी होता है। आरती करने से पूजा सफल मानी जाती है। इसलिए हर शुक्रवार को लक्ष्मी मां की आरती करनी चाहिए।  यदि आप देवी की आरती नहीं जानते हैं, तो हम आपको मां लक्ष्मी की संपूर्ण आरती बताने वाले हैं।

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सुख-समृद्धि के लिए मंत्र
या रक्ताम्बुजवासिनी विलासिनी चण्डांशु तेजस्विनी।
या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी ॥
या रत्नाकरमन्थनात्प्रगटिता विष्णोस्वया गेहिनी। 
सा मां पातु मनोरमा भगवती लक्ष्मीश्च पद्मावती ॥

मां लक्ष्मी की आरती 
ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।। 
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता। 
मैया तुम ही जग-माता।।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता। 
मैया सुख संपत्ति दाता। 
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

तुम पाताल-निवासिनि,तुम ही शुभदाता। 
मैया तुम ही शुभदाता। 
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी,भवनिधि की त्राता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता। 
मैया सब सद्गुण आता।
सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता। 
मैया वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव,सब तुमसे आता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता। 
मैया क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

महालक्ष्मी जी की आरती,जो कोई नर गाता। 
मैया जो कोई नर गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

ऊं  जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। 
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये खबर लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस खबर में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है
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