नवरात्रि के आठवें दिन माता के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा की जाती है। अष्टमी की तिथि के दिन महागौरी मां दुर्गा की पूजा से भक्तों के सभी तरह के पाप और कष्ट दूर हो जाते है। अष्टमी के दिन कुंवारी कन्याओं को भोजन करवाया जाता है। आज हम आपको बताते है इस दिन कैसे की जाती है पूजा अर्चना।
पूजन विधि
महा अष्टमी के दिन प्रातः उठ कर स्नान करने के बाद माता की प्रतिमा को अच्छे वस्त्रों से सुसज्जित करें और देवी भगवती की पूरे विधि और विधान से पूजा करनी चाहिए। मां के पूजन के लिए लाल फूलों का उपयोग करना चाहिए। पूजा के बाद मां को खीर, हलुआ और मिठाइयों का भोग लगाएं। इस दिन कन्या पूजन का भी विशेष महत्त्व है। कन्या पूजा में इस बात का विशेष ध्यान रखें कि कन्याओं की उम्र 2 से 12 वर्ष तक हो। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन घर में हवन करवाना बड़ा ही शुभ होता है।
पूजा करने के बाद इन मंत्रो का 108 बार जाप अवश्य करें।
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ॐ महागौर्य: नम:।'
'ॐ नवनिधि गौरी महादैव्ये नम:।'
हर मंत्र का जप करने से पहले संकल्प लें।
कन्या पूजन
अष्टमी के दिन कन्या पूजन का भी विधान है। वैसे, कन्या पूजा अष्टमी नवमी दोनों दिन किया जाता है, परन्तु धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अष्टमी पर कन्या पूजन करना श्रेष्ट रहता है। कन्याओं को देवी माता जी के तुल्ये आदर दिया जाता है। कन्या पूजन में 9 कन्याओं का पूजन श्रेष्ठ रहता है। सर्वप्रथम कन्याओं के पांव धोएं फिर उन्हें टीका चंदन लगाकर उनकी आरती करें। कन्याओं कि आरती करते समय मन में मां के नौ रूपों का ध्यान करें क्योंकि ये 9 कन्याएं मां के 9 रूपों को दर्शाती हैं।फिर कन्याओं को भोजन करवा कर कन्याओं को दक्षिणा भी दी जाती है। ऐसा करने से महामाया भगवती प्रसन्नता से हमारे मनोरथ पूर्ण करती हैं।