चंद्रमा का प्रभाव मनुष्य और प्रकृति पर समान रूप से पड़ता है। इसे ज्योतिष में रसों, सुखों और मन का स्वामी कहा गया है। जब चंद्रमा पर क्रूर ग्रहों की दृष्टि होती है तो मन प्रभावित होता है और विचलित होता है।
4 अप्रैल को ग्रहण के समय चंद्रमा पीड़ित होगा जिससे मेष, वृष, सिंह, कन्या, तुला, धनु और मीन राशि वालों के लिए कष्ट हो सकता है।
जबकि यह ग्रहण मिथुन, कर्क, वृश्चिक और कुंभ राशि वालों के लिए शुभ रहेगा। चंद्रहण के प्रभाव से बचने के उपाय तो हैं लकिन इसके लिए विधिपूर्वक उपाय करना होता है।
ग्रहण के समय नहीं करें यह काम
चार अप्रैल को होने वाला चन्द्र ग्रहण भारत में चंद्रोदय के समय लगा हुआ होगा। भारत के उत्तरपूर्वी इलाकों मे इस ग्रहण का खग्रास रूप दृश्य होगा।
आस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, जापान, मध्य एवं पूर्वी एशिया महाद्वीप, उत्तरी एवं दक्षिणी अमरीका महाद्वीप में भी यह दिखाई देगा।
जिन स्थानों में ग्रहण दिखाई देता है वहां इसका प्रभाव अवश्य पड़ता है। ग्रहण के मोक्ष काल में स्नान, दान आदि कर लेना चाहिए। ग्रहण के सूतक काल में वृद्ध, बालक एवं रोगियों को छोड़कर किसी दूसरे को भोजन, शयन, मैथुन आदि करना निषेध है।
ग्रहण के समय इन बातों का रखें ध्यान
इस बात का ध्यान रखें कि गर्भवती महिलाओं को ग्रहण काल में बाहर नहीं निकलना चाहिए और ग्रहण को बिल्कुल नहीं देखना चाहिए।
गर्भवती महिलाओं के पेट पर लाल गेरू लगाना चाहिए और राहु का जाप करना चाहिए। ग्रहण पर्व काल में स्नान, ध्यान, पूजा, अर्चना, हवन, दान आदि करने से पुण्य में हजारों गुणा वृद्धि होती है।
चंद्रमा, राहु का मंत्र जप करें। इस अवसर पर दान, हवन आदि करना चाहिए। चंद्रमा, राहु से पीड़ित हो तो यज्ञ हवन भी करने चाहिए।